महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लग गया. शिवसेना और एनसीपी को महामहिम ने जो समय दिया था उसमें वो बहुमत का जरूरी आंकड़ा उनके सामने पेश नहीं कर पाए. लग रहा था कि इसके बाद महाराष्ट्र की राजनीति में कुछ दिनों के लिए शांति छा जाएगी. लेकिन शांति के बजाए शोर बढ़ गया. राज्य की राजनीति में जो चेहरे बरसों से सामने नहीं आए थे वो भी उत्साहित हो उठे और शाम 6 बजे के बाद शुरु हुए तीन प्रेस कॉन्फ्रेंस ने माहौल गरम कर दिया. असली खेल अब चालू आहे.