देश में कोरोना के नए संक्रमण का खतरा बढ़ता ही जा रहा है, लेकिन चुनाव आते ही देश को जहरीले बोल की पुरानी बीमारी ने हमेशा की तरह फिर से जकड़ लिया है. खुद को धर्मगुरु कहने वाले लोग अनापशनाप बयानबाजी करके देश के संविधान और कानून दोनों को चुनौती दे रहे हैं. ताजा मामला हरिद्वार का है. जहां 3 दिन की धर्म संसद में एक धर्म विशेष के खिलाफ भड़काऊ बयान दिए गए. जो सत्यमेव जयते भारत का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य है, जो भारत के प्रतीक के नीचे देवनागरी लिपि में अंकित है, जो भारत की आत्मा है, हरिद्वार में हुई; इस धर्म संसद में उसे बदलने की भी कोशिश हुई.