जो बलिदान दिया था गलवान के वीरों ने वो व्यर्थ नहीं गया. जो शौर्य दिखाया हिमाच्छादित चोटियों पर भारतीय सेना ने उसने इतिहास रच दिया. चीन को लौटना पड़ा. चीन को लौटना पड़ा वापस अपनी हदों में.. 10 महीने के बाद चीन का लौटना सिर्फ दो देशों के बीच के विवाद के सुलझ जाने भर की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि ये लौटना दुनिया से नए भारत का परिचय करता है. वो भारत जो शौर्य और संयम की शक्ति से हर बाजी जीतना जानता है. 10 महीने लग गए. इन 10 महीनों में कई बार ये तो लगा कि बात युद्ध तक आ पहुंची है लेकिन ये कभी नहीं लगा कि भारत चीन की धमकियों को लेकर चिंतित है.. मानसिक दबाव की रणनीति हो या जंगी साजो-सामान की गर्जनाएं. भारत ने बराबर का जवाब दिया. नतीजा ये हुआ कि खोया कुछ नहीं, पाया है ये भरोसा कि हम लड़ेंगे और हम जीतेंगे. देखें खास कार्यक्रम, श्वेता सिंह के साथ.