महाकुंभ को आज 43 दिन हो गए हैं. दो दिन बाकी हैं. 26 फरवरी को शिवरात्रि के महास्नान के साथ महाकुंभ पूर्ण होगा। अब तक 63 करोड़ से ज्यादा लोग स्नान कर चुके हैं. लेकिन क्या कुंभ को लेकर अपनी सियासी भावना के मुताबिक राजनीति की गई है? जिसकी वजह से क्या कुंभ पर सियासी सवाल उठाने वालों को आगे वोट की राजनीति में भारी नुकसान हो सकता है? और सवाल ये भी कि क्या महाकुंभ देखने का धार्मिक चश्मा और राजनीतिक चश्मा अलग अलग है?