जिसने भी सियासी दूरबीन से दादरी को देखा सभी ने अपनी अपनी राजनीति को ही साधा. किसी को दादरी के जरीये मुसलमानो पर खतरा लगा तो किसी को हिनदुत्व की प्रयोगशाला नजर आई. किसी को दादरी में गौ माता दिखी तो किसी ने गौ माता की हत्या पर बदला लेने की ठान ली.