इंतज़ार की घड़ियां अब खत्म होने वाली हैं. शुक्रवार सुबह का सूरज पावन गंगा की लहरों पर जब बिखेरेगा अपनी किरणें तब पतित पावनी का जल और भी पवित्र हो उठेगा. इसमें समा जाएंगी नवग्रहों की शक्तियां, करीब तीन करोड़ तीर्थों का पुण्य और 33 करोड़ देवी देवताओं का आशीर्वाद.