सरकार के प्रस्ताव पर किसान अपने रुख पर डटे हैं. उन्होंने कहा है कि सरकार को तीनों कानून वापस लेने चाहिए. किसानों ने सरकार की बातचीत की अपील ठुकरा दी है. बात में क्या पेच है? सवाल इसलिए है कि सरकार कहती है बातचीत के लिए आओ. किसान भी मानते हैं कि बातचीत से ही बात बनेगी. फिर आखिर क्या बात है कि बात आगे नहीं बढ़ रही और आंदोलन 28 दिनों से वहीं का वहीं है. आंदोलन का कुछ समाधान निकलना बेहद जरुरी है. एक तरफ किसान कडाके की ठंड में सड़क पर हैं तो दूसरी ओर किसानों के आंदोलन की वजह से बड़ा आर्थिक नुकसान भी हो रहा है. आखिर क्यों नहीं बन रही है बात, देखें हल्ला बोल, अंजना ओम कश्यप के साथ.