किसानों के आंदोलन की लड़ाई जाटलैंड पर आकर टिक गई है. सरकार ने जाटलैंड के सियासी समीकरण को साधने का फूलप्रुफ प्लान बनाया है ताकि टिकैत के आंसू से गुस्से की जो लपट उठी है उस पर पानी डाला जा सके. कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन का टिकैत ने रुख मोड़ा तो जाटों ने प्रतिष्ठा का सवाल बना दिया. सरकार इसे बखूबी समझ रही है इसलिए अपने योद्धाओं को रणभूमि में उतार दिया है. अब ऐसे में सबसे बड़ा सवाल कि यूपी में चुनाव से पहले बीजेपी की किलेबंदी क्या आएगी काम या फिर विपक्ष किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर बीजेपी का खेल खराब करेगी. देखें हल्ला बोल, अंजना ओम कश्यप के साथ.