16 साल से जिस इलाके की नुमाइंदगी करते रहे, एक झटके में उसे छोड़ने का फैसला आसान नहीं कहा जा सकता. लाल कृष्ण आडवाणी ने जब परंपरागत गांधीनगर लोकसभा सीट छोड़ भोपाल से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई तो सबके जेहन में यही सवाल आ रहा है कि मोदी का किला छोड़ने पर क्यों मजबूर हुए आडवाणी?