ऑनलाइन मीडिया के रेगुलेशन के बारे में क्यों सोचा गया? क्यों सरकार नियमों का ये ड्राफ्ट लेकर आई है? ये बात काफी वक्त से हो रही है कि ऑनलाइन प्लेट्फॉर्म्स, डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया के दुरुपयोग की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से कोई पूछने वाला नहीं है. हिंसा, अश्लीलता, अपशब्दों से भरी सीरीज़ की भरमार है. कंटेंट चाहे समाज को तोड़ने वाला हो, या नफरत फैलाने वाला, या फिर आस्था का अपमान करने वाला, कहीं कोई लगाम नहीं है. खासतौर पर सोशल मीडिया का दुरुपयोग फेक न्यूज़ फैलाने में हुआ. ऐसे गलत तथ्य और गलत बातें प्रचारित की गईं. जिससे हिंसा को बढ़ावा मिलता है. देखें खबरदार.