किसान दिवस पर किसानों का आंदोलन अब आर या पार के मोड़ पर है. आज किसान नेता सरकारी चिट्ठी पर विचार विमर्श करने वाले हैं. अब तक के संकेत यही हैं कि किसान कानून वापस लिए जाने तक सरकार से बात करने को तैयार नहीं. उन्होंने आंदोलन की पूरी रूप रेखा का एलान कर दिया है. अब सारी निगाहें दिल्ली हरियाणा सिंघु बॉर्डर की तरफ टिक गई हैं, जहां 26 नवंबर से बड़ी तादाद में बैठे हुए हैं. यहां किसान नेता उस चिट्ठी पर माथापच्ची कर रहे हैं जो तीन दिन पहले सरकार की ओर से 40 किसान संगठनों को भेजा गया है. चिट्ठी का अहम मसौदा ये है कि आंदोलन की जगह सरकार से बात करें किसान. सवाल ये है कि सरकार से बातचीत को लेकर किसानों के मन में भरोसा क्यों नहीं? देखें वीडियो.