भारतीय राजनीतिक इतिहास में शायद ऐसा पहली बार हुआ, जब किसी राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को किसी मामले में साथ-साथ कोर्ट में पेशी देनी पड़ी. कोर्ट में महज 10 मिनट चली कार्रवाई से पहले सड़क से लेकर राजनीतिक गलियारे में ऐसी सरगर्मी पैदा हुई जिसने ठंड के मौसम में राजनीतिक माहौल गरम कर दिया.