यूं तो भारतीय सेना की जितने भी रेजिमेंट हैं, उनमें किसी में भी शौर्य की कमी नहीं है. लेकिन आज आजतक के खास कार्यक्रम ‘वंदे मातरम’ में उस रेजिमेंट की बात होगी, जो हर मुश्किलों को गीतों में पिरोने वाली है, जिनके गीतों के बीच तैयार होती है दुश्मन को खत्म करने की रणनीति होती है. जी हां, हम बात कर रहे हैं असम रेजिमेंट की कहानी, जो अपने शहीदों पर गर्व करती है. 1941 में असम रेजिमेंट की शुरुआत हुई. अपना स्थापना के साथ ही असम रेजिमेंट का सामना द्वितीय विश्व युद्ध से हुआ. अपने पहले ही ऑपरेशन में 71 वीरता सम्मान दिए गए, जो एक रिकॉर्ड है. असम रेजिमेंट के बेमिसाल शौर्य की दास्तान जानने के लिए वीडियो देखें.