कहते हैं कलम थामने वाले हाथ कभी बंदूक नहीं थामते. कहते ये भी हैं कि कलम से ज़्यादा ख़तरनाक कोई दूसरा हथियार हो भी नहीं सकता. उसी कलम से लिखे जा रहे ऐसे ही ख़त की कहानी जो बंदूक से भी ज़्यादा ख़तरनाक और गोली से भी ज़्यादा जानलेवा है.