कहानी तो शुरू होती है 2000 से, मगर तब यूपी में जुर्म की सूरत थोड़ी अलग थी. क्येंकि तब जुर्म और सियासत ऐसे घुला-मिला था कि नेता और क्रिमिनल को साथ-साथ देखना मानो रोजमर्रा की बात हो. लिहाजा कहानी शुरू करते हैं, 2008 से और चलते हैं 2020 तक. क्योंकि 2020 में विकास दुबे की कहानी लगभग खत्म हो ही जाएगी. तो इन बारह सालों में जब आप फ्रेम दर फ्रेम विकास दुबे को देखेंगे तो राजनीति, अपराध और पुलिस, तीनों की तिकड़ी की दास्तान बड़ी आसानी से समझ जाएंगे. देखें वारदात.