अल्लाह मुझे माफ करे... फिर ऐसी गलती नहीं करूंगा. ये आखिरी अल्फाज थे.. अजमल आमिर कसाब के. कसाब को फांसी पर लटकाने के पूरे ऑपरेशन को बेहद गोपनीयता से अंजाम दिया गया था. सिर्फ गिने-चुने लोगों को इसकी खबर दी गई थी. कहा जाता है कि मुंबई के आर्थर जेल से कसाब को पुणे के यरवडा जेल ट्रांसफर करने के बावजूद आईटीबीपी के जवान मुंबई में कसाब के खाली सेल की पहरेदारी करते रहे.