वो उससे प्यार करता था लेकिन उसकी मुहब्बत इकतरफा थी. वो उससे इज़हार-ए-मुहब्बत भी कर चुका था लेकिन जवाब में उसे ना सुनने को मिला. और जब उसे प्यार में नाकामी मिली तो बन गया दिलजला और इस दिलजले ने अपने ही हाथों अपने प्यार का जनाजा उठाने की साज़िश रच डाली. उसने एक खंज़र उठाया और अपने प्यार पर खंज़र चला दिया.