अपने बेटे की कब्र से चार हजार किलोमीटर दूर उसकी मां बस इस इंतजार में जी रही थी कि एक एक बार वो अपने बेटे की कब्र देख ले. एक दिन सेना के कुछ अफसरों को इस मां का दर्द पता चला. इसके बाद उन्होंने तय किया कि वो ना सिर्फ उस मां को उसके बेटे की कब्र तक ले जाएंगे बल्कि इस कब्र को ही उठा कर उस मां तक पहुंचा देंगे.