वाकई इस सफर के बारे में सोच कर ही रौंगटे खड़े हो जाते हैं. कहां तो उड़ना था उन्हें आसमान में और कहां आसमान ही उनपर टूट पड़ा. फिर जब जमीन पर आए तो ऐसे बिखरे मलबे की शक्ल में कि समेटने में ही पांच दिन लग गए. इसके बाद 298 लाशों को समेट कर ताबूत में रख दिया गया. ताकि आगे का सफर पूरा किया जा सके और फिर आगे का सफर शुरू होता है. दि डेथ ट्रेन के साथ. यानी एक ऐसी ट्रेन जिसमें सिर्फ मुर्दे ही मुर्दे थे.
vardat: a journey of 298 dead bodies