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Rajasthan: जान बचाने को भागा बंदर, लेपर्ड ने दौड़ाकर दबोचा… सरिस्का में पर्यटकों ने देखा Live शिकार, Video

राजस्थान के अलवर जिले में बने सरिस्का टाइगर रिजर्व में पर्यटकों ने लेपर्ड के शिकार करने का लाइव नजारा अपनी आंखों से देखा. शिकार करने के बाद लेपर्ड वापस अपने शिकार को लेकर जंगल की ओर चला गया. मंगलवार को यह पूरा दृश्य नेचर गाइड अर्जुन और राजू के साथ ही पर्यटकों ने भी अपने मोबाइल में कैद कर लिया.

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तेंदुए के शिकार करने का यह वीडियो सामने आया है.
तेंदुए के शिकार करने का यह वीडियो सामने आया है.

देश-विदेश में अपनी खास पहचान रखने वाले राजस्थान के अलवर जिले में बने सरिस्का टाइगर रिजर्व में करणाका बास पांडुपोल रोड पर एक लेपर्ड ने बंदर का शिकार किया. इस दौरान सरिस्का में घूमने के लिए पहुंचे पर्यटकों ने इस पूरे घटनाक्रम को अपने मोबाइल में कैद कर लिया. पयटकों की गाड़ी के सामने से आगे जान बचाने के लिए बंदर भाग रहा था. वहीं, लेपर्ड उसका तेजी से पीछा करते दिखाई दिया. 

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चंद सेकंड में लेपर्ड ने बंदर को दबोच लिया. इतना ही नहीं, शिकार करने के बाद लेपर्ड वापस अपने शिकार को लेकर जंगल की ओर चला गया. मंगलवार को यह पूरा दृश्य नेचर गाइड अर्जुन और राजू के साथ ही पर्यटकों ने भी अपने मोबाइल में कैद कर लिया. अब इसका वीडियो सामने आया है. 

यहां देखिए पहला वीडियो...

यहां देखिए दूसरा वीडियो...

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काफी संख्या में दिखते हैं बाघ और पैंथर 

बताते चलें कि सरिस्का आने वाले पर्यटकों को बाघ और पैंथर काफी संख्या में दिखते हैं. साथ ही बाघ द्वारा शिकार करने, बाघ को देखकर पैंथर के पेड़ पर चढ़ने, बाघ द्वारा अपने शिकार को लेकर पेड़ पर चढ़ने सहित कई नजारे भी देखने को मिलते हैं. इन दृश्यों को देखकर यहां आने वाले पर्यटक रोमांचित होते हैं. लगातार वन्यजीवों की मूवमेंट के कारण पर्यटकों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हो रहा है. 

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खूबसूरत और बड़ा है सरिस्का का जंगल 

सरिस्का में इस समय 33 बाघ और 300 से ज्यादा लेपर्ड, हिरण, बारहसिंगा, नीलगाय, चीतल सहित सैकड़ों तरह की प्रजातियों के पशु-पक्षी मौजूद हैं. सरिस्का 886 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है, जिसमें नदी, नाले और तालाब मौजूद हैं. घने जंगल में वन्य जीव घूमते हैं. सरिस्का का जंगल अन्य जगहों की तुलना में खूबसूरत और बड़ा है. इसलिए यहां पर्यटक घूमने के लिए आते हैं.

साल 2005 में बाघ विहीन हो गया था सरिस्का 

क्रिकेटर, फिल्मी सितारे, राजनेता सभी सरिस्का का आने लगे हैं. इसलिए सरिस्का की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ रही है. साल 2005 में सरिस्का बाघ विहीन हो गया था. उसके बाद पहली बार देश में बाघों को एयरलिफ्ट करके सरिस्का में शिफ्ट किया गया. इससके बाद से यहां बाघों की संख्या में इजाफा हो रहा है. सरिस्का के डीएफओ ने महेंद्र शर्मा ने बताया कि सरिस्का में पर्यटकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. बाघ, पैंथर और अन्य वन्यजीव की बेहतर साइटिंग हो रही है. तो बाघ का कुनबा भी बढ़ रहा है.

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