राजस्थान के बूंदी जिले में एक निजी फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों ने ऋण न चुकाने के कारण एक युवती का घर सील कर दिया था. जिससे तंग आकर युवती ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली. इस बात की जानकारी पुलिस ने एक न्यूज को दी. जिसके मुताबिक घटना के बाद दिव्या मीना को कोटा के महाराव भीम सिंह अस्पताल ले जाया गया, जहां शनिवार देर रात इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि घटना शनिवार दोपहर केशोरायपाटन क्षेत्र के तीरथ में हुई, जब आवास फाइनेंस लिमिटेड के कर्मचारियों ने पुलिस टीम के साथ स्थानीय अदालत द्वारा जारी जब्ती आदेश के बाद घर को सील कर दिया. केशोरायपाटन के सर्किल ऑफिसर देवेश भारद्वाज ने बताया कि दिव्या के पिता महेश मीना ने घर बनाने के लिए 2021 में कंपनी से 7 लाख रुपये उधार लिए थे, लेकिन पारिवारिक संकट के कारण वे ऋण नहीं चुका पाए.
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भारद्वाज ने हालांकि यह भी बताया कि महेश ने डिफॉल्ट करने से पहले 17 किश्तें चुकाई थीं. सीओ के अनुसार फाइनेंस कंपनी ने जब्ती के लिए कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया और उधारकर्ता को नोटिस देने के बाद पहले ही सूचित कर दिया था.
शनिवार को कर्मचारी महेश के घर पहुंचे और उनकी मौजूदगी में घर को सील कर दिया. अधिकारी ने कहा कि जिस वक्त घर सील किया जा रहा था, उस वक्त दिव्या एक खेत में काम कर रही थी. वहीं, शाम 4 बजे घर लौटी तो उसने घर को सील पाया. यह सदमा वह बर्दाश्त नहीं कर सकी. जिसके बाद वह पड़ोसी के छत से घर के अंदर घुस गई और जहर खा लिया.
अधिकारी ने बताया कि पड़ोसी और परिवार के सदस्य उसे अस्पताल ले गए, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. सर्किल अधिकारी ने बताया कि उसके पिता ने फाइनेंस कंपनी पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है और उनकी शिकायत के आधार पर कंपनी के कर्मचारी अर्जुन मालव और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता अधिनियम की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है. वहीं, इस कर्ज के कारण दिव्या की मां ने भी डेढ़ साल पहले आत्महत्या कर ली थी.
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