राजस्थान में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं. इससे पहले राजस्थान में सरगर्मियां तेज हो गई हैं. मई में गर्मी बढ़ने के साथ साथ सियासी पारा भी बढ़ने वाला है. दरअसल, इस बार बीजेपी और कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टियों ने राजस्थान को राजनीति अखाड़ा बनाने का फैसला किया है. कांग्रेस जहां अगले हफ्ते राजस्थान के उदयपुर में चिंतन शिविर करने जा रही है. इसमें सोनिया गांधी समेत तमाम बड़े नेता शामिल होंगे. तो वहीं, बीजेपी भी 20 और 21 मई को जयपुर में मंथन करेगी.
उदयपुर : अंदरूनी चुनौतियों से निपटना कांग्रेस का लक्ष्य
अपने बुरे दौर से गुजर रही कांग्रेस ने उदयपुर में 13 से 15 मई यानी तीन दिन का चिंतन शिविर बुलाया है. इसमें शामिल होने के लिए नेताओं को आमंत्रण भी भेजे जा चुके हैं. सभी को 12 मई तक आने के लिए कहा गया है. उधर, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत भी एक्टिव मोड में आ गए हैं. उन्होंने उदयपुर पहुंचकर चिंतन शिविर की तैयारियों का जायजा लिया.
तीन दिन के इस शिविर में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है. इसके अलावा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल भी चिंतन शिविर में पहुंचेंगे. इस शिविर में 400 से ज्यादा नेता हिस्सा लेंगे. कांग्रेस ने इसके लिए सभी CWC सदस्य, राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष, सीएलपी नेता, विधानसभा में नेताओं, कांग्रेस सांसदों और पार्टी के विभिन्न संगठनों के प्रमुखों को निमंत्रण भेजा है.
पार्टी का प्रदर्शन सुधारने की रणनीति पर होगा विचार
कांग्रेस एक के बाद एक कर राज्यों से सत्ता गंवा रही है. हाल ही में 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा. इन सबके बीच कांग्रेस में लगातार नेतृत्व परिवर्तन की भी मांग उठ रही है. इन सब चुनौतियों से निपटने के लिए कांग्रेस ने यह चिंतन शिविर बुलाया है. इस शिविर में आने वाले राज्यों में विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार होगी.
कांग्रेस का चिंतन शिविर ऐसे वक्त पर हो रहा है, जब पार्टी ने आगे की राजनीतिक चुनौतियों से निपटने और 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए रणनीति तैयार करने के लिए एक कमेटी के गठन का ऐलान किया है. चिंतन शिविर में कांग्रेस के देशभर के बड़े नेता शामिल होंगे, यहां पार्टी के आंतरिक मुद्दों पर चर्चा होगी, साथ ही संगठन को मजबूत करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर भी विचार होगा.
इतना ही नहीं सोनिया गांधी ने चिंतन शिविर के दौरान राजनीतिक और संगठनात्मक महत्व, सामाजिक न्याय, अर्थव्यवस्था, किसानों और युवाओं के मुद्दों पर चर्चा के लिए 6 पैनल भी बनाए हैं. इस शिविर में मल्लिकार्जुन खड़गे जहां राजनीतिक मुद्दों पर पैनल का नेतृत्व करेंगे, वहीं भूपिंदर सिंह हुड्डा कृषि और किसानों पर समिति का नेतृत्व करेंगे. मुकुल वासनिक संगठनात्मक मामलों के समन्वय पैनल का नेतृत्व करेंगे. सोनिया गांधी ने इन पैनलों में G 23 के तमाम नेताओं को शामिल किया है, जो कांग्रेस में लगातार नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर रहे हैं.
बीजेपी ने जयपुर में बुलाई हाई लेवल मीटिंग
उधर, बीजेपी ने जयपुर में 20-21 मई को हाई लेवल मीटिंग बुलाई है. इसमें बीजेपी के तमाम बड़े नेता आगे की रणनीतियों और चुनौतियों पर मंथन करेंगे. सूत्रों के मुताबिक, दो दिन चलने वाली इस बैठक में बीजेपी नेता राज्यों में आगामी चुनावों के लिए रणनीति और मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर चर्चा करेंगे.
इस साल मई के आखिर में नरेंद्र मोदी सरकार को 8 साल पूरे हो रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में मोदी सरकार के 8 साल पर विचार विमर्श भी मुख्य आकर्षण होगा. बताया जा रहा है कि पीएम मोदी बैठक के एक सेशन को वर्चुअली संबोधित करेंगे.
बैठक की अध्यक्षता बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा करेंगे. इस बैठक में सभी राष्ट्रीय पदाधिकारी, राज्यों के पार्टी अध्यक्ष, इंचार्ज और महासचिव (संगठनात्मक ) शामिल होंगे. 2020 में कोरोना काल के बाद पार्टी नेताओं की यह पहली फिजिकल बैठक है. हालांकि, वर्चुअल तौर पर बैठकें होती रही हैं.
बीजेपी ने प्रदेश अध्यक्षों से मांगी रिपोर्ट
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने प्रदेश अध्यक्षों और महासचिवों (संगठन) को अपने-अपने राज्य में पार्टी द्वारा की गई गतिविधियों पर रिपोर्ट लाने को कहा है. कांग्रेस शासित राज्य राजस्थान में बीजेपी द्वारा बैठक करने का फैसला इसलिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि हाल ही में बीजेपी के टारगेट पर गहलोत सरकार रही है. खासकर राज्य में कई जगहों पर हिंसा होने के मुद्दे पर.
दोनों पार्टियों के लिए अहम है ये बैठकें
कांग्रेस और बीजेपी दोनों के लिए ये बैठकें अहम मानी जा रही हैं. खासकर हाल ही में 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए थे. जहां बीजेपी ने इनमें अच्छा प्रदर्शन किया है, ऐसे में पार्टी पर गुजरात, हिमाचल और कर्नाटक में आने वाले विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती है. तो वहीं, 5 राज्यों में हार के बाद कांग्रेस के लिए इस चिंतन शिविर को और अहम माना जा रहा है. दरअसल, पार्टी का फोकस गुजरात, हिमाचल और कर्नाटक विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन सुधारने पर है.