पूरे विश्व में जहां-जहां पर भगवान श्री कृष्ण के भक्त मौजूद हैं वह आज श्री कृष्ण जन्माष्टमी मना रहे हैं. राजस्थान के करौली में एक परिवार ऐसा है जो शहर के प्रसिद्ध मंदिर में बीते 184 साल से जन्माष्टमी के मौके पर भगवान श्री कृष्ण के लिए पोशाक चढ़ाता आ रहा है. वर्तमान में परिवार की सातवीं पीढ़ी इस परंपरा को निभा रही है और आगे बढ़ा रही है. बताया गया कि परिवार के द्वारा चढ़ाई गई पोशाक को मंदिर के पुजारी (गुसाई) नंद बाबा बनकर स्वीकार करते हैं.
दरअसल, राजस्थान के करौली में श्री राधा मदन मोहन जी का प्राचीन मंदिर मौजूद है. वैसे तो साल भर इस मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी ही रहती है, लेकिन श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ पहुंचती है. हजारों की संख्या में भक्त यहां पर राधा-कृष्ण के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इस मंदिर में बीते 184 साल जन्माष्टमी के मौके पर शहर के चौधरी परिवार के द्वारा भगवान श्री कृष्ण के लिए पोशाक भेंट होती आ रही है.
खास पोशाक की जाती है भेंट
बताया गया कि रियासतकालीन समय से चौधरी परिवार के यहां पर भगवान श्री कृष्ण के विशेष रूप से तैयार की गई पोशाक जन्माष्मी के मौके पर भेंट की जाती है. इसके लिए पूरा चौधरी परिवार बहुत ही खास तरीके के तैयार हुआ. पोशाक भेंट करने के लिए गाजे-बाजे का इंतजाम किया गया. काफी लोग जुड़े और फिर पोशाक को मंदिर के पुजारी (गुसाई) प्रदीप किशोर गोस्वामी को भेंट की गई. कहा गया कि मंदिर के पुजारी प्रदीप किशोर गोस्वामी नंद बाबा बनकर इस पोशाक को स्वीकार करते हैं.
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चौधरी परिवार की 7वीं पीढ़ी
बताया गया है कि 184 साल से मंदिर में पोशाक भेंट करते आ रहे चौधरी परिवार की 7वीं पीढ़ी चल रही है. मगर, परिवार की इस परंपरा को अभी भी जिंदा रखा गया है. इस परंपरा को परिवार बहुत ही शिद्दत के साथ निभा रहा है और आगे लेकर जा रहा है.
ढांड़ा-ढांड़ी नृत्य
श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर श्री राधा मदन मोहन जी मंदिर में खास तैयारियां की जाती हैं. भगवान के जन्म से पहले मंदिर परिसर में बधाई गीत गाए जाते हैं. परम्परा के अनुसार ढांड़ा-ढांड़ी नृत्य का आयोजन किया जाता है. नन्द बाबा का दरबार सजाया जाता है फिर ढांड़ा-ढांड़ी नृत्य के दौरान नन्दबाबा को कान्हा जन्म की बधाई दी गई.