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जयपुर बम ब्लास्ट केस में HC ने फैसला पलटा, फांसी की सजा पाने वाले चारों दोषी बरी

राजस्थान की हाई कोर्ट ने जयपुर में हुए सीरियल ब्लास्ट के मामले में सभी 4 दोषियों को बरी कर दिया है. बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने दोषियों की अपील को मंजूर करते हुए उनके पक्ष में राहत भरा फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने मामले के दोषी एक नाबालिग का मामला किशोर बोर्ड को भेजा है. बाकी सभी अभियुक्तों को बरी किया.

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राजस्थान की हाई कोर्ट ने जयपुर में हुए सीरियल ब्लास्ट के मामले में सभी 4 दोषियों को बरी कर दिया है. अदालत ने इस मामले में डेथ रेफरेंस सहित दोषियों की ओर से पेश 28 अपीलों पर फैसला सुनाया है. बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने दोषियों की अपील को मंजूर करते हुए उनके पक्ष में राहत भरा फैसला सुनाया है. राजस्थान हाई कोर्ट के जस्टिस पंकज भंडारी और जस्टिस समीर जैन की खंडपीठ ने इस मामले पर फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने मामले के दोषी एक नाबालिग का मामला किशोर बोर्ड को भेजा है. बाकी सभी अभियुक्तों को बरी किया.

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हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मामले में जांच एजेंसी को उनकी लापरवाही, सतही और अक्षम कार्यों के लिए जिम्मेदार/जवाबदेह बनाया जाना चाहिए. ऊपर बताए गए कारणों से मामला जघन्य प्रकृति का होने के बावजूद 71 लोगों की जान चली गई और 185 लोगों को चोटें आईं, जिससे न केवल जयपुर शहर में, बल्कि हर नागरिक के जीवन में अशांति फैल गई. पूरे देश में हम जांच दल के दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित जांच/अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने के लिए राजस्थान पुलिस के महानिदेशक को निर्देशित करना उचित समझते हैं.

कोर्ट ने कहा कि यह मामला संस्थागत विफलता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसके परिणामस्वरूप गलत/त्रुटिपूर्ण/घटिया जांच हुई है. हमें डर है कि जांच एजेंसियों की विफलता के कारण पीड़ित होने वाला यह पहला मामला नहीं है और अगर चीजों को वैसे ही जारी रहने दिया जाता है तो यह निश्चित रूप से आखिरी मामला नहीं होगा, जिसमें घटिया जांच के कारण न्याय प्रशासन प्रभावित हुआ हो. इसलिए, हम राज्य, विशेष रूप से मुख्य सचिव को जनहित में इस मामले को देखने का निर्देश देते हैं.

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निचली अदालत ने माना था दोषी

इससे पहले साल 2019 में जयपुर की निचली अदालत ने जयपुर बम ब्लास्ट केस में फैसला सुनाते हुए इस मामले के चार आरोपियों को दोषी माना था. आरोपियों को UAPA के तहत अलग-अलग धाराओं में दोषी माना गया था. वहीं अदालत ने एक आरोपी को बरी भी कर दिया था.  दरअसल इस मामले में कुल पांच आरोपी थे. 2019 में जब निचली अदालत ने सुनवाई की तो उनमें से चार को दोषी पाया, जबकि एक को बरी कर दिया था. 

2019 में अदालत ने इस मामले में आरोपी शाहबाज हुसैन को बरी किया था. वहीं मोहम्मद सैफ, सरवर आजमी, सैफुर्रहमान और एक नाबालिग को दोषी करार दिया था. जानकारी के मुताबिक पांचों आरोपी उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं. 

इस मामले पर सुनवाई के दौरान जस्टिस पंकज भंडारी और समीर जैन की खंडपीठ ने कहा कि जांच अधिकारी को कानूनी ज्ञान नहीं है. इसलिए जांच अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश डीजीपी को दिए गए हैं. कोर्ट ने मुख्य सचिव को जांच अधिकारियों से जांच कराने को भी कहा है. 

2008 में दहल उठा था जयपुर

दरअसल 2008 में हुए इस सीरियल बम ब्लास्ट के बाद राजस्थान सरकार ने आरोपियों को पकड़ने के लिए एंटी टेरेरिस्ट स्क्वाड़ (एटीएस) का गठन किया था. इस मामले में जयपुर के चांदपोल हनुमान मंदिर, सांगानेरी गेट हनुमान मंदिर समेत कई जगहों पर धमाके हुए थे. 

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क्या है जयपुर सीरियल ब्लास्ट? 

आपको बता दें कि राजस्थान की राजधानी जयपुर में 13 मई 2008 को सीरियल बम ब्लास्ट हुए थे. अलग-अलग जगहों पर 8 सिलसिलेवार धमाकों से पुरा जयपुर ही दहल उठा था. इस मामले में 71 लोगों की जान गई थी और करीब 176 लोग घायल हुए थे. जयपुर ब्लास्ट मामले में एटीएस ने 11 आतंकियों को नामजद किया था.

इस मामले में पांच आरोपियों को एटीएस राजस्थान ने गिरफ्तार कर लिया था. वहीं हैदराबाद पुलिस ने इस मामले से जुड़े दो आंतकियों को गिरफ्तार किया था. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने भी एक आतंकी को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की थी. वहीं तीन आरोपी लंबे समय तक फरार रहे जबकि दो आरोपियों की मौत हो चुकी है.

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