उत्तर प्रदेश में चल रही सियासी खींचतान पर केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी की प्रतिक्रिया सामने आई है. एक दिवसीय जयपुर दौरे पर पहुंचे जयंत चौधरी ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि जैसे परिवार में आपस में थोड़ा बहुत संवाद और बातचीत होती है, यह लोकतंत्र का सिद्धांत है, उस संवाद का आप लोग अलग मायने निकाल रहे हो, जबकि ऐसी कोई बात नहीं है और हम परिवार की तरह काम कर रहे हैं.
इस दौरान उन्होंने कहा कि मैं पॉलिटिकल बयानबाजी नहीं करना चाहूंगा. फिर भी हम जीते हैं. कुछ लोग हारे हैं. विपक्ष की अपनी भूमिका होती है लेकिन सत्ता पक्ष की अपनी जिम्मेदारी होती है. हम अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं. हम अपनी नजर विपक्ष की तरफ रख रहे हैं, ताकि वह भी हमारा सहयोग कर सके.
यूपी में कावड़ यात्रा के दौरान दुकानों के बाहर मालिक का नाम अंकित करने से जुड़े मामले पर उन्होंने कहा कि अब जो सुप्रीम कोर्ट का आदेश आ गया है. तो इस पर कुछ नहीं कहना. चौटाला से मुलाकात को लेकर हो रही सियासत पर उन्होंने कहा कि सभी मुलाक़ात राजनीतिक दृष्टि से नहीं होती. चौटाला जी ने मुझसे मुलाकात की थी लेकिन वो कौशल विकास के संदर्भ में थी. उनकी एक संस्था चंडीगढ़ में है, उसके अवलोकन के लिए बात हुई थी.
बता दें कि 4 जून को लोकसभा चुनाव के परिणाम आए तो यूपी में परिवर्तन की चार्चाओं का सियासी बाजार गर्म हो गया. सियासी गलियारे में यही दावे सुनाई देने लगे कि यूपी में खराब प्रदर्शन की गाज किसी बड़े नेता पर गिरेगी. इन चर्चाओं को हवा दे दी केशव प्रसाद मौर्य के एक बयान ने. बस फिर क्या था अंदरूनी लड़ाई सतह पर आ गई. दावे होने लगे कि यूपी में मुख्यमंत्री बदला जा सकता है. हालांकि बीजेपी ने इन दावों को खारिज कर दिया.