राजस्थान के कोटा में JEE परीक्षा की तैयारी कर रहे 17 साल के छात्र ने हॉस्टल में फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया. इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है. मृतक बच्चे के परिजनों का कहना है कि जब उनका बेटा कोचिंग नहीं जा रहा था तो उन्हें इस बार में सूचना क्यों नहीं दी. जबकि पुलिस कह रही है छात्र ने अलग-अलग नंबरों परिजनों को बता रहा था. मृतक छात्र ने इतने नंबर क्यों बदले की जांच की जा रही है. पिछले कुछ समय से कोटा में छात्रों के आत्महत्या के मामले बढ़े हैं. इस पर राजस्थान मानव आयोग ने जिल प्रशासन से डिटेल रिपोर्ट मांगी है.
मृतक अली राजा के चाचा सईक सलमानी का कहना है कि उसके पिता 5 साल पहले सऊदी अरब रहते थे. बेटे की पढ़ाई का खर्चा उठाने के लिए माता-पिता मुंबई शिफ्ट हुए थे. अली जब भी फीस की डिमांड करता था. माता पिता जैसे तैसे व्यवस्था करके इंतजाम करते थे. बच्चे की मौत की सूचना पर दोनों सदमे में हैं. अली कोचिंग नहीं जा रहा था. इसकी जानकारी फोन पर देनी चाहिए थी.
महावीर नगर थानाधिकारी परमजीत सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पढ़ाई के तनाव की बात सामने आ रही है. छात्र 1 महीने से कोचिंग नहीं जा रहा था. उसने परिवार वालों के अलग-अलग 3 नंबर बता रखे थे. अभी पुलिस मामले की जांच कर रही है. अली यूपी के शाहजहांपुर का रहने वाला था. बता दें, कोटा में पिछले एक साल में 22 कोचिंग छात्रों की मौत हुई, जिसमें 18 ने फांसी के फंदे पर लटकर अपनी जान दी.
इस पर राजस्थान राज्य मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस जीके व्यास ने जिला प्रशासन से इस पर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है. जिसमें हर कोचिंग सेंटर में छात्रों की संख्या, कोचिंग सेंटरों में किसी प्रकार के भेदभाव, छात्रों के रहने की व्यवस्था, फीस आदी का विस्तृत ब्योरा देने को कहा है. जस्टिस जीके व्यास ने कहा है कि कोटा शहर में कई कोचिंग सेंटर है, यहां प्रदेश और बाहर के राज्यों से छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए आते हैं. इनमें कई होनहार छात्र आत्महत्या कर लेते हैं जो एक गंभीर मसला है.
(इनपुट- चेतन गुर्जर)