राजस्थान के कोटा में एक पिता को कोर्ट ने बेटी के साथ दुष्कर्म करने के मामले में अंतिम सांस तक जेल की सजा सुनाई है. लड़की माता-पिता छोटी बहनों के साथ रहती थी. पिता उस पर गलत नजर रखता था. 19-20 दिसंबर 2022 को मां बाजार और छोटी बहन बाहर खेलने गई थी.
शाम करीब 6:00 बजे वो रसोई में खाना बना रही थी. तभी पिता ने पकड़ लिया और कमरे में ले जाकर दुष्कर्म किया. बाजार से लौटने पर बेटी ने मां को बताया तो पति-पत्नी में झगड़ा हुआ. इसके बाद पिता ने माफी मांगते हुए दोबारा गलती नहीं करने की बात कही.
लोक-लाज के डर से पीड़िता ने रिपोर्ट नहीं करवाई. मगर, उसने हिम्मत दिखाई और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. उसने अपने बयान में कहा कि 14 साल की उम्र से पिता उसके साथ दुष्कर्म करता रहा है.
विशेष लोक अभियोजक ललित कुमार शर्मा ने बताया कि 9 मार्च 2023 को उद्योग नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज हुई थी. आरोपी ने 19-20 दिसंबर 2022 और 26 जनवरी 2023 को 14 साल की बेटी से दुष्कर्म किया. इससे पहले भी वो कई बार ऐसा कर चुका था. मामले की जांच के बाद पुलिस ने 1 मई 2023 को चालान पेश किया और अभियोजन पक्ष की ओर से बयान करवाए गए.
'चलो उठो काली अंधेरी रात गुजर चुकी है'
बेटी से दुष्कर्म के आरोपी पिता को कोर्ट ने अंतिम सांस तक की सजा सुनाई है. साथ ही ₹10,000 जुर्माना लगाया है. पीड़िता के लिए 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की भी अनुशंसा कोर्ट ने की है. विशेष न्यायाधीश दीपक दुबे ने 17 पेज के फैसले में न केवल दुष्कर्म के कुकुत्य की निंदा की. बल्कि पीड़िता का हौसला भी बढ़ाया. उसे हिम्मत देते हुए फैसले में लिखा-
हमारी बिटिया रानी तुम होनहार खिलाड़ी हो. विपरीत परिस्थितियों में साहस व धैर्य के साथ लड़ना और विजयी होना तुम्हारे खून में है. चलो उठो काली अंधेरी रात गुजर चुकी है. आशाओं का सूरज नई किरण के साथ तुम्हें बुला रहा है. आगे बढ़ो, थाम लो अपनी खुशहाल जिंदगी का दामन और आशाओं के उन्मुक्त आसमान में उड़कर अपने सपनों को साकार करो.
राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी है पीड़िता
'विशेष न्यायाधीश दीपक दुबे ने फैसले में लिखा कि श्रेष्ठ परवरिश व संस्कारों के चलते ही बेटी ने राष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रतियोगिता में भाग लिया. वह 25 जनवरी 2023 को राष्ट्रीय स्तर पर खेलकर लौटी थी. पिता ने उसे शाबाशी देने की बजाय दूसरे ही दिन 26 जनवरी को जब देश गणतंत्र दिवस मना रहा था, तब मानवता को कलंकित करने का काम किया. इस प्रकार का उदाहरण संभवतया दानवों में भी नहीं पाया जाता'.
'समय परिवर्तनशील है लेकिन आरोपी का कलंक और बेटी की कटु स्मृतियां संभवत कभी नहीं मिटेंगीं. आरोपी अपनी आखिरी सांस तक प्रत्येक क्षण कारागार में अपने पापों का प्रायश्चित करता रहेगा. उसे देखकर भविष्य में कोई पिता अपनी बेटी को कुदृष्टि से देखने की हिम्मत नहीं करेगा'. विशेष न्यायाधीश दीपक दुबे ने फैसले में रामचरित्र मानस के बाली वध प्रसंग की चौपाई लिखी-
बाली ने मरते समय भगवान श्रीराम से अपने वध का कारण पूछा. तब श्रीराम कहते हैं-
अनुज बधू भगिनी सुत नारी। सुनु सठ कन्या सम ए चारी॥
इन्हहि कुदृष्टि बिलोकइ जोई। ताहि बधें कछु पाप न होई॥