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कश्मीर मार्च, राम जन्मभूमि आंदोलन में जेल, ABVP-RSS कनेक्शन... जानिए राजस्थान के CM बनने जा रहे भजनलाल को

राजस्थान के नए मुख्यमंत्री चुने गए भजन लाल शर्मा तीन दशकों से राजनीति में सक्रिय हैं. वे अब तक संगठन के लिए काम करते आए हैं. शर्मा चार बार संगठन महामंत्री रहे हैं. बीजेपी ने इस बार सांगानेर से सिटिंग विधायक का टिकट काटकर सबसे सेफ सीट पर लड़ाया था. इतना ही नहीं, शर्मा को अमित शाह के करीबी माना जाता है.

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बीजेपी ने भजन लाल शर्मा को राजस्थान का नया मुख्यमंत्री चुना है. 
बीजेपी ने भजन लाल शर्मा को राजस्थान का नया मुख्यमंत्री चुना है. 

भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश की तरह राजस्थान में चौंकाने वाला फैसला लिया है. यहां पहली बार के MLA भजन लाल शर्मा (54 साल) को विधायक दल का नेता चुना गया है. वे जयपुर की सांगानेर सीट से चुनाव जीते हैं. अभी तक शर्मा राजस्थान में बीजेपी के महामंत्री रहे हैं. भजन लाल का 34 साल का राजनीतिक अनुभव है. उन्होंने अब तक संगठन में रहकर ही काम किया है. चेहरा निर्विवाद रहा है और पार्टी से जुड़े कार्यक्रमों में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया है.

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भजनलाल शर्मा ने अपने करियर की शुरुआत छात्र राजनीति से की. बाद में वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े और सामाजिक कार्यों में शामिल होने लगे. शर्मा ने 1992 में अयोध्या में राम मंदिर के लिए आंदोलन में भी सक्रियता निभाई.  1992 में उन्हें जेल में भी रहना पड़ा. वे 27 साल की उम्र में अपने गांव अटारी के सरपंच भी रहे हैं.

'सरपंच से शुरुआत, अब सीएम बने भजन लाल शर्मा'

पिछले तीन दशकों में शर्मा ने भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) और पार्टी संगठन में विभिन्न पदों पर कार्य किया है. उन्होंने भरतपुर जिले के अटारी गांव और नदबई शहर में शुरुआती पढ़ाई की. बाद में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में शामिल हो गए. उन्होंने नबादी और भरतपुर में सामाजिक मुद्दे भी उठाए. बाद में शर्मा बीजेपी की युवा शाखा भाजयुमो में चले गए. वे तीन बार भाजयुमो के जिला अध्यक्ष रहे. भरतपुर में बीजेपी के जिला सचिव और जिला अध्यक्ष भी रहे हैं. बाद में प्रदेश उपाध्यक्ष बने और अब फिर महासचिव की जिम्मेदारी संभाली. 

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'कश्मीर मार्च में लिया था हिस्सा'

शर्मा के जीवन में तब नया पड़ाव आया, जब वो 1990 में ABVP के विरोध-प्रदर्शन में चर्चाओं में आए. वे 1990 में कश्मीर मार्च में भी शामिल हुए थे. दरअसल, 1990 में देशभर से हजारों छात्र और एबीवीपी से जुड़े पदाधिकारी और कार्यकर्ता जम्मू में एकत्रित हुए थे और श्रीनगर की ओर मार्च किया था. हालांकि, शर्मा समेत मार्च में शामिल लोगों को रास्ते में रोक दिया था. घाटी में कश्मीरी पंडितों पर हमलों के विरोध में उधमपुर में गिरफ्तारी देने वाले कई लोगों में शर्मा भी शामिल थे.

'शाह के करीबी माने जाते हैं शर्मा'

शर्मा चार बार संगठन महामंत्री रहे हैं.  इस बार उन्होंने अपने गृह जिले भरतपुर से टिकट मांगा था. लेकिन, पार्टी ने सुरक्षित सीट सांगानेर से उम्मीदवार बनाया. इससे पहले 2018 के चुनाव में भी शर्मा ने टिकट मांगा था, लेकिन पार्टी ने दूसरे उम्मीदवार पर भरोसा जताया था. उससे पहले भी एक चुनाव शर्मा बीजेपी से बगावत करके लड़ चुके हैं. हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. शर्मा को अमित शाह का करीबी माना जाता है. फिलहाल, राजस्थान में पहली बार के विधायक को मुख्यमंत्री बना जाने की चर्चाएं खूब हो रही हैं. भजन लाल शर्मा ने पॉलिटिकल साइंस से मास्टर्स की डिग्री हासिल की. वे एग्रीकल्चर सप्लाई बिजनेस से जुड़े हैं.

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बीजेपी ने भजन लाल शर्मा को राजस्थान का नया मुख्यमंत्री चुना है. 

उत्तर भारत में पहले ब्राह्मण सीएम होंगे शर्मा

भजनलाल शर्मा ब्राह्मण समाज से आते हैं. राजस्थान में इससे पहले 1990 में हरिदेव जोशी आखिरी ब्राह्मण सीएम थे. बीजेपी ने 33 साल बाद फिर से एक ब्राह्मण चेहरे को राजस्थान का मुख्यमंत्री बनाया है. उत्तर भारत में अभी राजस्थान पहला राज्य है, जहां ब्राह्मण मुख्यमंत्री होगा. यूपी, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश में ब्राह्मण चेहरे डिप्टी सीएम तो बने लेकिन सीएम नहीं. ऐसे में एक झटके में ब्राह्मण को ही सीएम बनाकर ये धारणा तोड़ी गई कि ब्राह्मणों को सिर्फ डिप्टी सीएम पद से संतोष करना होगा.

राजस्थान में 8 प्रतिशत हैं ब्राह्मण वोटर्स

उत्तर भारत में वोट के लिहाज से देखें तो राजस्थान में 8 फीसदी ब्राह्मण वोट हैं. यूपी में 10 से 12 प्रतिशत ब्राह्मण वोट बताए जाते हैं. हिमाचल प्रदेश में 18 फीसदी हैं. मध्य प्रदेश में 6 प्रतिशत, बिहार में चार फीसदी ब्राह्मण हैं. जानकार कहते हैं कि ब्राह्मण वोटर आबादी में जितना होता है, उससे ज्यादा प्रभावी होकर वोट देता है. कहा जा रहा है कि क्या बीजेपी ने भजन लाल शर्मा वाले दांव से एक पूरे सर्किल को साधने की कोशिश की है. छत्तीसगढ़ में आदिवासी सीएम बनाकर बीजेपी ने सोशल इंजीनियरिंग की शुरुआत की, फिर मध्य प्रदेश में ओबीसी चेहरे को चुनकर एक और बड़ा समुदाय साधने की जमीन तैयार कर दी. अब राजस्थान में ब्राह्मण सीएम के साथ रणनीति को नए सिरे से देखा जा रहा है.

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बता दें कि राजस्थान में नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में 199 सीटों पर मतदान हुआ. इनमें से बीजेपी ने 115 सीटों पर जीत हासिल की. बीजेपी ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी चुनाव जीता.

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