पुलवामा हमले में शहीद हुए राजस्थान के धौलपुर जिले के जवान भगीरथ के परिजनों सरकार से अधूरी घोषणाओं को पूरी कराने की मांग की है. परिजनों का कहना है कि मुख्य चौराहे पर शहीद भागीरथ की प्रतिमा लगाई जाए. शहीद के नाम से स्वास्थ्य केंद्र और सरकारी स्कूल का नामकरण किया जाए. शहीद के परिवार को नि:शुल्क कृषि कनेक्शन के साथ जयपुर में आवास दिलाने की भी मांग की है.
दरसअल, राजस्थान के धौलपुर जिले के राजाखेड़ा इलाके के गांव जैतपुर के रहने वाले सैनिक भागीरथ 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद हो गए थे. शहीद भागीरथ की शहादत को आज तीन वर्ष का समय हो गया है. इसके बाद भी शहीद का परिवार को सरकार द्वारा की गई घोषणाएं पूरी नहीं हुई हैं. अब शहीद का परिवार इन घोषणाओं को पूरी करने का मांग कर रहा है.
नहीं लगवाई प्रतिमा
शहीद के परिजनों ने बताया कि शासन और प्रशासन ने जिला मुख्यालय के मुख्य चौराहे पर शहीद भागीरथ की प्रतिमा लगाकर शहीद भागीरथ के नाम से चौराहे का नाम करने की घोषणा की थी. इसके अलावा शहीद के नाम से स्वास्थ्य केंद्र और सरकारी स्कूल का नाम रखने की भी घोषणा की थी. सरकार द्वारा शहीद के परिवार को नि:शुल्क कृषि कनेक्शन के साथ जयपुर में आवास दिलाने की घोषणा की गई थी.
सरकार पूरी करे सभी घोषणाएं
सरकार द्वारा शहीद के गांव में मूर्ति लगाने की भी घोषणा की थी,लेकिन परिजनों ने निजी खर्चे पर मूर्ति को लगवाई है. अब शहीद का परिवार सरकार से मांग कर रहा है कि सभी घोषणाओं को पूरा किया जाए. शहीद की पत्नी वीरांगना रंजना देवी और शहीद के चाचा जरदान सिंह ने बताया कि जयपुर में आयोजित धरना-प्रदर्शन को लेकर हमारे पास फोन आया था,लेकिन वह नहीं गए.
रंजना ने कहा कि कि जयपुर में वीरांगनाओं के साथ हुई अभद्रता गलत हैं. सरकार ने नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन नौकरी हमने अपने पुत्र के नाम करा दी. रंजना ने आगे बताया कि सरकार की ओर से जो आर्थिक सहायता मिलनी थी वह मिल चुकी है.
धरने पर बैठी थीं वीरांगनाएं
गौरतलब है कि साल 2019 के पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए 3 जवानों की वीरांगनाओं ने प्रदर्शन किया था. वह नियमों में बदलाव की मांग करते हुए कुछ दिनों से सीएम गहलोत से मुलाकात का समय मांग रही थीं. उनकी मांग है कि न सिर्फ उनके बच्चों, बल्कि उनके रिश्तेदारों को भी अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी दी जाए. उनकी अन्य मांगों में शहीद के नाम पर सड़कों का निर्माण और उनके गांवों में शहीदों की प्रतिमाएं लगाना भी शामिल है. इसके बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत साफ कर चुके हैं कि वे किसी शहीद के बच्चे की नौकरी का हक नहीं मारेंगे, लेकिन किसी के रिश्तेदार को नौकरी देना ठीक परंपरा नहीं है.