राजस्थान में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. बीजेपी, कांग्रेस सहित अन्य पार्टियों के नेता चुनावी रैलियां व सभाएं कर रहे हैं. इन रैलियों में नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है. सभाओं, रैलियों में बुलडोजर नजर आ रहे हैं, जिनके जरिए पार्टी कार्यकर्ता अपने नेताओं का स्वागत कर रहे हैंं. 21 तोपों की जगह पर 21 बुलडोजरों की सलामी दी जा रही है. सभाओं में जाने के लिए कार्यकर्ता बुलडोजर पर सवार होकर पहुंच रहे हैं.
इस खास ट्रेंड के कारण जयपुर में आलम यह हो गया है कि निर्माण कार्य के लिए बुलडोजर की कमी होने लगी है. ऊंचे दाम देने के बाद भी पीला पंजा नहीं मिल रहा है. मिट्टी खुदाई सहित दूसरे कामों के लिए लोगों को परेशान होना पड़ रहा है. वहीं, बुलडोजर शोरूम के मालिकों और बुलडोजर किराए पर देने वालों की चांदी हो गई है. वह दिन का 5-5 गुना कमा रहे हैं.
दरअसल, राजस्थान में महीनेभर पहले तक सड़क किनारे बुलडोजरों की लाइन लगी रहती थी. चालक इस इंतजार में रहते थे कि कोई आएगा और बुलडोजर किराए पर लेगा. बुलडोजर के एक घंटे की कीमत तीन सौ रुपए ली जाती है. मिट्टी खोदने सहित दूसरे कामों में बुलडोजर का उपयोग किया जाता है. मगर, अब यह बुलडोजर सड़क से गायब हो गए हैं और नेताओं की सभाओं, रैलियों में नजर आ रहे हैं.
नेताओं की पसंद बना बुलडोजर
चुनाव में पहले गाड़ियों और बाद में हेलीकाप्टर के लिए नेता परेशान रहते थे. मगर, राजस्थान चुनाव में तो हर तरफ बुलडोजर की डिमांड हो रही है. चुनाव प्रचार में नेता कहते हैं ''हम आ रहे हैं स्वागत नहीं करोगे बुलडोजर से''. नेताओं में होड़ लगी है कि किसका स्वागत कितने बुलडोजरों से होता है.
मंत्री जी को दी गई 21 बुलडोजर की सलामी
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह का जोधपुर में 21 बुलडोजर की सलामी देकर स्वागत किया गया. सचिन पायलट का स्वागत तो समर्थक बिना बुलडोजर के करते हीं नहीं हैं. अब तो पायलट की सभाओं में लोग भाषण सुनने भी बुलडोजर पर सवार होकर आते हैं.
यही हालत आरएसपी के सांसद हुनामन बेनीवाल, बीजेपी नेता राजेंद्र राठोड़, सतिश पूनिया और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी के स्वागत समारोह में देखा जा रही है. वहीं, बीजेपी की परिवर्तन संकल्प यात्रा में रोजाना पूरे राजस्थान में करीब 100 बुलडोजर केवल नेताओं पर फूल बरसाने के काम में लिए जा रहे हैं.
निर्माण कार्य के लिए नहीं मिल रहे बुलडोजर
निर्माण कार्य कराने वाले ठेकेदार शंकर सिंह कहते हैं कि पहले बुलडोजर लाने-जाने पर आने के लिए आपस में बुलडोजर ड्राइवर झगड़ जाते थे. अब 800 रुपए घंटे की कीमत पर भी बुलडोजर उपलब्ध नहीं हैं. इस कारण से निर्माण कार्यों की लागत बढ़ गई है. हम लोग ड्राइवरों को दिन की जो मजदूरी देते थे, वह तो इन लोगों को ऐसे ही मिल जा रही है.
हर दिन का दो हजार रुपए किराया मिल रहा
जयपुर में जेसीबी बेचने वाले शोरूम के मालिक ने कहा कि बीते साल के जितने बुलडोजर इस साल के अगस्त-सितंबर महीने में ही बिक गए हैं. वहीं, राजेंद्र नाम के व्यक्ति ने बताया कि उनके पास 6 बुलडोजर हैं. अगले तीन महीने के लिए सारे बुलडोजर चुनाव प्रचार कराने वाली एजेंसी ने ले रखे हैं. एजेंसी एक बुलडोजर का हर दिन का दो हजार रुपए किराया दे रही है.