150 फीट गहरे गढ्ढे में फंसी तीन साल की बच्ची चेतना को बचाने का प्रयास आठवें दिन भी जारी है. L शेप में टनल बनाने का काम किया जा रहा है, इसमें काफी वक्त लग रहा है. पांच फीट टनल खोदने के बाद भी जिस बोरवेल में बच्ची है, बचाव दल के सदस्य वहां तक नही पहुंच पा रहे हैं. बीच में पत्थर के चट्टान आ गए हैं. भीलवाड़ा से एक विशेषज्ञों की टीम पत्थर काटने के औज़ार लेकर आई है, जिससे पत्थर काटने का काम चल रहा है. बचाव टीम को इस बात का डर लग रहा है कि ज्यादा वाइब्रेशन पर बच्ची नीचे जा सकती है. ये बोरवेल 700 फीट गहरा है.
आज शाम तक बाहर आ सकती है चेतना
बचाव कार्य में लगे NDRF की टीम के अनुसार उन्हें उम्मीद है कि आज शाम तक चेतना को बाहर निकाला जा सकता है. दरअसल जिस बोरवेल में चेतना फंसी हुई है, उसकी मिट्टी बलुई है और धंसने-बिखरने वाली है, जिसकी वजह से 10 फ़ीट दूर पाइलिंग मशीन से पैरलल 170 फ़ीट का गड्ढा खोदा गया है. इसमें पाइप से केसिंग करके उसे सुरक्षित किया गया है. उसके बाद NDRF की टीम के तीन प्रशिक्षित जवानों को नीचे उतारा गया है. वो वापस L शेप में टनल खोदकर जिस बोरवेल में बच्ची फंसी हुई है, वहां तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. नीचे जैसे-जैसे टनल खोद रहे हैं, वैसे वैसे पाइप से लोहे की पाइप से केसिंग भी कर रहे हैं, ताकि मिट्टी ढहे नहीं.
इस काम में लगातार बारिश होने की वजह से ख़लल पड़ रही थी. हालांकि, 8 दिन हो जाने की वजह से घर वालों में उदासी है और गांव के लोग प्रशासन के खिलाफ गुस्से में हैं. इन्हें लगता है कि 150 फ़ीट गढ्ढे तो प्रशासन दो दिनों में खोद सकता था, मगर बार बार नए तरीके आजमाने से देरी हो गई है.
LED स्क्रीन से रखी जा रही है नजर
जो लोग नीचे टनल खोदने का काम कर रहे हैं, वो ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर गए हैं और ऊपर से LED स्क्रीन पर प्रशासन मॉनिटर कर रहा है. वॉकी टॉकी से उनसे बातचीत भी की जा रही है. बीच बीच में एक व्यक्ति को भेजकर उनकी स्थिति भी देखी जा रही है. हर घंटे नीचे काम करने वालों की अदला-बदली भी की जा रही है.