राजस्थान में राजेंद्र गुढ़ा को मंत्री पद से बर्खास्त करने के बाद अब गहलोत सरकार ने उनके करीबी पर शिकंजा कसा है. गुढ़ा के करीबी झुंझुनू जिले की उदयपुरवाटी नगरपालिका के चेयरमैन रामनिवास सैनी पर गाज गिरी है, उन्हें चेयरमैन और सदस्य के पद से निलंबित कर दिया गया है.
डीएलबी डायरेक्टर ह्रदेश कुमार शर्मा ने रामनिवास सैनी को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया है. यह पूरा मामला नगरपालिका में चार मालियों की भर्ती मामले से जुड़ा हुआ है.
ये भी पढ़ें- 'गहलोत ने लाल डायरी जलाने को कहा था', पूर्व मंत्री ने बताई विधानसभा की पूरी कहानी
गहलोत सरकार में मंत्री रहे राजेंद्र गुढ़ा ने मणिपुर में महिलाओं के साथ की गई दरिंदगी के बाद बीजेपी सरकार की जगह गहलोत सरकार पर ही सवाल उठाए थे. गुढ़ा ने कहा था कि हमें अपने गिरेबां में झांककर देखना चाहिए. दरअसल राजस्थान में भी महिलाओं के साथ हिंसा की कई घटनाएं सामने आई थीं, जिसको लेकर बीजेपी लगातार कांग्रेस पर हमलावर है. राजस्थान सरकार की आलोचना के बाद गहलोत ने राजेंद्र गुढ़ा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया था, जिसके बाद कांग्रेस ने भी गुढ़ा को पार्टी से बाहर कर दिया.
सस्पेंड होने के बाद के बाद गुढ़ा लाल डायरी लेकर विधानसभा पहुंचे थे, जिसके बाद उन्हें विधानसभा से मार्शल आउट करा दिया गया था. गुढ़ा ने दावा किया था कि इस लाल डायरी में अशोक गहलोत के विधायकों की खरीद फरोख्त को लेकर हिसाब था और उस डायरी को बाउंसर्स ने छीन लिया है.
ये भी पढ़ें- राजस्थान की राजनीति का 'डायरी ड्रामा', जानें क्या है लाल डायरी का राज
राजस्थान में चुनाव के बाद राजेंद्र गुढ़ा बीएसपी की टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. बाद में गुढ़ा ने कांग्रेस का दामन थाम लिया. उनके साथ बीएसपी के छह विधायक भी थे. साल 2008 में जब गुढ़ा बसपा के ही टिकट पर पहली बार विधानसभा पहुंचे थे, तब भी सभी विधायकों के साथ वे कांग्रेस में शामिल हो गए थे. गुढ़ा को मंत्री बनाकर सीएम गहलोत ने इसका इनाम भी दिया लेकिन यहीं से दोनों नेताओं के बीच रिश्तों में खटास की शुरुआत भी मानी जाती है और आज दोनों नेताओं के रिश्ते इतने तल्ख हो गए हैं कि गुढ़ा मंत्रिमंडल ही नहीं, कांग्रेस पार्टी से भी बाहर हो चुके हैं.