राजस्थान के बाड़मेर जिले में बायतु थानेदार के तबादले को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. BJP और RLP का कहना है कि थानेदार ने प्रधान के बेटे के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने का केस दर्ज किया था. इसी वजह से राजनीतिक रसूख में थानेदार का तबादला करवा दिया गया. इसी मामले को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि जब से थानेदार आए हैं, तब से अपराधियों में खौफ है, लेकिन ये बात कुछ नेताओं को हजम नहीं हुई. जबकि, कांग्रेस नेताओं का कहना है कि दोनों (बीजेपी और आरएलडी) पार्टियां राजनीति रोटियां सेक रही हैं.
दरअसल, 2 दिन पहले जोधपुर रेंज आईजी ने बाड़मेर जिले के बायतु थानाधिकारी ओम प्रकाश का तबादला पुलिस लाइन बाड़मेर किया था. इसके बाद से कस्बे के लोग बेहद खफा हैं. लोगों ने रविवार को अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर प्रदर्शन किया और थानाधिकारी का तबादला निरस्त करने की मांग की. लोगों का कहना है कि थानेदार ओमप्रकाश के आने के बाद से अपराध में कमी आई थी, लेकिन द्वेषतापूर्ण तरीके से तबादला करना उचित नहीं है.
प्रधान के बेटे के खिलाफ दर्ज किया था मामला
करीब 6 महीने पहले बाड़मेर एसपी ने आरजीटी थानाधिकारी से ओम प्रकाश का तबादला बायतु किया था. कुछ दिनों पहले ही ओम प्रकाश ने प्रधान के बेटे के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था. इसके बाद से ही स्थानीय जनप्रतिनिधि खफा थे. उसी समय प्रधान के साथ ही कई कांग्रेस के जनप्रतिनिधियों ने एसपी से लेकर अधिकारियों से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की थी. इसी बीच थानेदार का आईजी ने तबादला किया. अब लोगों को संदेह है कि आईजी ने राजनीतिक दबाव में तबादला किया है.
राजनीतिक दबाव में किया गया तबादला- बीजेपी नेता
बीजेपी के जिला महामंत्री बालाराम मूढ़ का कहना है कि बायतु थानाधिकारी के आने के बाद से कस्बे में क्राइम घटा. मगर, जनप्रतिनिधियों ने अपने स्वार्थ के लिए राजनीतिक दबाव से तबादला करवा दिया. जनता की मांग पर तबादला निरस्त किया जाना चाहिए.
तबादला निरस्त कर वापस लगाया जाए- आरएलपी
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री ओमप्रकाश कांकड़ के मुताबिक, बायतु में ओमप्रकाश की पोस्टिंग के बाद अपराध में कमी आई और अपराधियों में पुलिस का भय कायम हुआ था. मगर जिस तरह थानेदार से द्वेषता रखते हुए तबादला करवाया गया है, यह गलत है.