राजस्थान में अशोक गहलोत गुट की कुर्सी पर संकट अभी टला नहीं है. केंद्रीय आलाकमान ने 30 सितंबर के बाद सीएम को लेकर फैसला करने का संकेत दिया था. हालांकि, नामांकन की आखिरी तारीख निकल गई है. अभी तक पार्टी की तरफ से कोई निर्णय नहीं लिया गया है. खबर है कि गहलोत गुट के विधायकों ने भी अब तक अपने इस्तीफे वापस नहीं लिए हैं और ना ही स्पीकर की तरफ से स्थिति साफ की गई है. बताया गया है कि गहलोत गुट के विधायकों ने कहा है कि जब तक दिल्ली से अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री पद पर रहने का ऐलान नहीं होगा, तब तक इस्तीफा वापस नहीं लेंगे.
बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव में पार्टी हाईकमान अशोक गहलोत के नाम पर विचार कर रहा था. ऐसे में उनकी जगह राजस्थान के सीएम पद पर सचिन पायलट की ताजपोशी किए जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं. इस संबंध में पार्टी की तरफ से मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन को जयपुर भेजा गया था. दोनों ऑब्जर्वर को विधायक दल की बैठक लेना था. उससे पहले ही गहलोत समर्थक विधायकों ने मंत्री शांति धारीवाल के घर एकत्रित होकर सामूहिक इस्तीफे पर हस्ताक्षर कर दिए.
गहलोत कैंप से ही विधायक बनाने की मांग
इन विधायकों का कहना था कि बिना भरोसे में लिए पार्टी सचिन पायलट को राजस्थान का उत्तराधिकारी बनाने जा रही है. जबकि पायलट गुट ने दो साल पहले 18 विधायकों के साथ बगावत की थी. ऐसे में पायलट को मुख्यमंत्री बनाना स्वीकार नहीं होगा. बागी विधायकों ने ये भी कहा था कि पार्टी हाईकमान 102 विधायकों (गहलोत कैंप) में से किसी को भी मुख्यमंत्री के लिए चुन सकती है. लेकिन, पायलट का समर्थन नहीं करेंगे.
अजय माकन पर लगाए थे गंभीर आरोप
इतना ही नहीं, इन विधायकों ने प्रदेश प्रभारी अजय माकन पर खुलकर हमला बोला था और कहा था कि माकन यहां पक्षपात पूर्ण रवैये से काम कर रहे हैं. वे जयपुर में एक एजेंडे के साथ आए हैं और पायलट को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं. माकन विधायकों को कन्वेंस भी करने में जुटे हैं. हालांकि, बाद में कांग्रेस हाईकमान ने इस पूरे मामले में पर्यवेक्षकों से रिपोर्ट तलब की और तीन विधायकों नोटिस जारी किया था. जबकि गहलोत को क्लीन चिट दे दी गई थी.
गहलोत ने सोनिया गांधी से मांगी थी माफी
बाद में गहलोत दिल्ली आए और दस जनपथ पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की. गहलोत ने रविवार के घटनाक्रम पर माफी मांगी और कहा कि इस घटनाक्रम ने उनको पूरी तरह हिलाकर रख दिया है. उन्होंने घटना की खुद जिम्मेदारी ली और पार्टी के एक लाइन के प्रस्ताव को पास नहीं करा पाने के लिए खुद को सीधे तौर पर जिम्मेदार बताया. गहलोत का कहना था कि वे सोनिया गांधी के आशीर्वाद से ही तीसरी बार मुख्यमंत्री बने थे.
राजस्थान के सीएम पर सोनिया का फैसला आना बाकी
गहलोत के बाहर निकलने पर पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा था कि राजस्थान के मसले पर कांग्रेस अध्यक्ष 30 सितंबर के बाद फैसला लेंगी. यानी अशोक गहलोत सीएम रहेंगे या नहीं, इस पर सोनिया गांधी का अंतिम निर्णय आएगा. गुरुवार शाम ही सचिन पायलट ने भी सोनिया गांधी से मुलाकात की थी और राजस्थान के घटनाक्रम से अवगत कराया था.
खड़गे के नॉमिनेशन के बाद जयपुर पहुंचे गहलोत
गहलोत शुक्रवार को भी दिल्ली में रहे और कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव में मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ नामांकन प्रक्रिया में शामिल हुए. शाम को वे वापस जयपुर लौट गए.