राजस्थान में सियासी तापमान बढ़ गया है. अशोक गहलोत ने चालू मॉनसून सत्र के दौरान महिलाओं के खिलाफ अपराध को लेकर अपनी ही सरकार पर सवाल उठाने वाले राजेंद्र गुढ़ा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया है. गहलोत कैबिनेट से बर्खास्त किए जाने के बाद गुढ़ा को कांग्रेस ने भी पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है.
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गहलोत मंत्रिमंडल से बर्खास्त, कांग्रेस से निष्कासित किए गए राजेंद्र गुढ़ा कभी अशोक गहलोत के खास हुआ करते थे. फिर आखिर ऐसा क्या हुआ कि सीएम गहलोत के संकटमोचक माने वाले राजेंद्र गुढ़ा ने अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया? सीएम गहलोत और राजेंद्र गुढ़ा के बीच क्यों और कैसे दुश्मनी का मोर्चा खुल गया?
कौन हैं राजेंद्र गुढ़ा?
राजस्थान के झुंझुनू जिले के उदयपुरवाटी से विधायक राजेंद्र, गुढ़ा गांव के रहने वाले हैं. राजेंद्र ने अपने नाम के साथ गांव का नाम भी जोड़ लिया और इस तरह उनका नाम हो गया राजेंद्र गुढ़ा. राजेंद्र गुढ़ा 2018 के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के टिकट पर दूसरी बार विधायक निर्वाचित हुए थे. राजेंद्र गुढ़ा उन नेताओं में शामिल थे जो 2020 में सचिन पायलट जब अपने समर्थक विधायकों के साथ हरियाणा के मानेसर चले गए थे, तब सीएम गहलोत के साथ डटकर खड़े थे.
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गुढ़ा बसपा विधायक दल के नेता भी थे. गुढ़ा ने बाद में बसपा के सभी विधायकों के साथ कांग्रेस का दामन थाम लिया था. गुढ़ा समेत बसपा के छह विधायक थे. राजस्थान में बसपा विधायक दल का कांग्रेस में विलय हो गया. साल 2008 में जब गुढ़ा बसपा के ही टिकट पर पहली बार विधानसभा पहुंचे थे, तब भी सभी विधायकों के साथ वे कांग्रेस में शामिल हो गए थे. गुढ़ा को मंत्री बनाकर सीएम गहलोत ने इसका इनाम भी दिया लेकिन यहीं से दोनों नेताओं के बीच रिश्तों में खटास की शुरुआत भी मानी जाती है और आज दोनों नेताओं के रिश्ते इतने तल्ख हो गए हैं कि गुढ़ा मंत्रिमंडल ही नहीं, कांग्रेस पार्टी से भी बाहर हो चुके हैं.
क्यों और कब शुरू हुई थी नाराजगी?
दरअसल, अशोक गहलोत ने सभी बसपा विधायों के साथ कांग्रेस में शामिल हुए राजेंद्र गुढ़ा को मंत्री तो बनाया लेकिन काफी देर से. गुढ़ा ने मंत्री बनाए जाने में देर को लेकर भी नाराजगी जताई थी. राजेंद्र गुढ़ा ने तीन साल पहले कांग्रेस के तत्कालीन राजस्थान प्रभारी अजय माकन से मुलाकात के बाद अपनी पीड़ा व्यक्त की थी. सीएम गहलोत ने बाद में गुढ़ा को मंत्रिमंडल में शामिल किया था.
गुढ़ा को राज्यमंत्री बनाया गया और उनके साथ 2009 में बसपा से आए रमेश मीणा कैबिनेट मंत्री थे. राजेंद्र गुढ़ा खुद को रमेश मीणा से सीनियर मानते थे और उनको रमेश के नीचे काम करना नागवार गुजर रहा था. समस्या की जड़ ये भी बताई जा रही है कि गुढ़ा के पास फाइलें भी कम ही आ पाती थीं. न तो अपने विभाग में गुढ़ा की चल पाती थी और ना ही कोई अधिकारी ही उनकी बात को तवज्जो देता था. इन सबको लेकर गुढ़ा नाराज थे. इसी बीच गुढ़ा के साथ बसपा से कांग्रेस में आए विधायक भी सीएम गहलोत के साथ हो गए.
साथ आए विधायकों पर भी ढीली हो गई पकड़
राजेंद्र गुढ़ा को ये लग रहा था कि जो पांच विधायक बसपा से उनके साथ आए हैं, उनपर उनकी पकड़ बरकरार रहेगी. सीएम गहलोत ने भी गुढ़ा को ये भरोसा दिलाया था. लेकिन बदले हालात में बसपा से आए विधायकों के सीएम गहलोत के साथ हो लिए. विधायकों का साफ कहना था कि गुढ़ा को मंत्री पद मिल गया लेकिन हमें क्या मिला? गुढ़ा ने भी एक इंटरव्यू में कहा था कि हमने आश्वासन दिया था कि दो-तीन विधायकों को मंत्री या अन्य पद के साथ ही संगठन में भी जगह मिलेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
बसपा विधायक जब गुढ़ा की जगह सीएम गहलोत की सुनने लगे तो उनको अपने सियासी वजूद पर संकट मंडराता नजर आने लगा. गुढ़ा ने सीधे-सीधे सीएम गहलोत और उनकी सरकार के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया. गहलोत से नाराजगी का असर ये हुआ कि गुढ़ा उन्हीं सचिन पायलट के करीब आ गए जिनके विरोध में वे सीएम के साथ कभी डटकर खड़े थे.
गुढ़ा के बयान से घिरी गहलोत सरकार
गौरतलब है कि गुढ़ा ने पिछले दिनों सचिन पायलट की अजमेर से जयपुर तक की पदयात्रा के दौरान भी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे. इस महीने की शुरुआत में ही कांग्रेस ने नेताओं को बयानबाजी से बचने की हिदायत दी थी और साफ किया था निर्देश नहीं मानने वाले नेताओं पर कार्रवाई होगी. फिर भी गुढ़ा नहीं रुके. जब पूरे देश के कांग्रेस नेता मणिपुर की घटना को लेकर बीजेपी को घेरने में जुटे थे, गुढ़ा ने विधानसभा में अपनी ही सरकार को घेर लिया.
राजेंद्र गुढ़ा ने विधानसभा में कहा था,"इस बात में सच्चाई है कि हम राजस्थान में महिलाओं की सुरक्षा में विफल हो गए हैं. राजस्थान में जिस तरह से महिलाओं पर अत्याचार बढ़े हैं, हमें मणिपुर की जगह अपने राज्य की स्थिति देखनी चाहिए." गुढ़ा के बयान को आधार बनाकर विपक्षी बीजेपी ने सरकार पर हमला बोल दिया. सीएम गहलोत ने इसके बाद गुढ़ा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की राज्यपाल से सिफारिश कर दी थी.