राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच छिड़ी सियासी वर्चस्व जंग में भले ही कांग्रेस का सिरदर्द बढ़ गया है, लेकिन इस एपिसोड ने बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की भी टेंशन बढ़ा दी है. पायलट वुसंधरा राजे सरकार के कार्यकाल में हुए कथित भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर अनशन पर बैठ गए हैं. पायलट की सीएम गहलोत से मांग कर रहे है कि करप्शन की जांच कराकर कार्रवाई करें. यह पायलट का सीधे तौर पर वसुंधरा राजे पर अटैक है और यह 2023 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी में सीएम फेस की वसुंधरा की दावेदारी की राह में मुश्किलें खड़ी कर सकता है?
वसुंधरा राजे पर पायलट का सीधा टारगेट
सचिन पायलट जयपुर के शहीद स्मारक पर अपने समर्थकों के साथ मौन व्रत पर बैठे हैं. पायलट ने इस बार मुद्दे चुनने और उसे उठाने का तरीका तय करने में काफी सावधानी बरती है. पायलट के अनशन के मंच पर जो पोस्टर लगाया गया है, उसमें साफ तौर पर वसुंधरा राजे सरकार में हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ 'अनशन' लिखा है. इस तरह पायलट सिर्फ वसुंधरा सरकार के दौरान हुए भ्रष्टाचार के मामले की जांच मांग नहीं बल्कि कार्रवाई की डिमांड कर रहे हैं.
सचिन पायलट ने अशोक गहलोत पर जरूर सवाल उठाए हैं, लेकिन उनके निशाने पर वसुंधरा राजे हैं. 2003 से 2008 के कार्यकाल में हुए घोटालों की जांच का मुद्दा उठा रहे हैं, इस समय वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री थी. साल 2008 में कांग्रेस सत्ता में आई तो बीजेपी शासन में हुए घोटालों की जांच के लिए माथुर आयोग का गठन किया गया. माथुर आयोग ने पांच साल तक कोई रिपोर्ट नहीं दी. तब हम कुछ नहीं कर पाए, इस बार उम्मीद है कि सरकार कोई कदम उठाएंगे. पायलट ने कहा कि यह बात वे किसी दुश्मनी के तहत नहीं कह रहे हैं बल्कि जिन घोटालों को हमने जनता के बीच जाकर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए थे, उन वादों पर खरा उतरने के लिए कह रहे हैं. अगर हम अपने किए वादों पर खरे नहीं उतरेंगे तो राज्य की जनता हम पर विश्वास कैसे करेगी?
भ्रष्टाचार की जांच की मांग अब क्यों उठा रहे
पायलट सीएम गहलोत की बीजेपी नेता वसुंधरा राजे के बीच की राजनीतिक नजदीकियों से वाकिफ हैं. समझा जाता है कि पिछली बार गहलोत सरकार गिराने की पायलट की कोशिश नाकाम करने में वसुंधरा की अघोषित मदद का महत्वपूर्ण हाथ था. पायलट ने अनशन पर बैठक गहलोत और वसुंधरा राजे की मिली भगत को भी उजागर करना चाहते हैं. इस तरह से भले पायलट का टारगेट गहलोत हों, लेकिन निशाना वसुंधरा राजे सिंधिया पर ताना गया है.
खनन से लेकर बजरी घोटाला तक...
सचिन पायलट की मांग है कि वसुधरा राजे सरकार में हुए खान महाघोटाला, भ्रष्टाचार, 90 बी घोटाला, बजरी, खनन माफिया समेत कई घोटाले को कांग्रेस ने 2018 के विधानसभा चुनाव में मुद्दा बनाया था. उस समय गहलोत ने ही कहा था कि कांग्रेस सरकार आएगी तो जांच करवाएंगे, आरोपी जेल में होंगे, लेकिन जांच नहीं करवाई जा रही. पायलट ने कहा कि राजस्थान में अवैध खनन, बजरी माफिया, शराब माफिया मामले में भी कार्रवाई की बात की थी. अब चुनाव में ज्यादा समय नहीं रह गया है, इसलिए कांग्रेस सरकार को अपना वादा पूरा करना चाहिए ताकि चुनाव के दौरान लोगों के बीच जाने पर असुविधाजनक सवालों का सामना न करना पड़े.
सचिन पायलट ने प्रेस कांफ्रेंस करके गहलोत सरकार पर ही नहीं वसुंधरा राजे पर भी सीधा अटैक किया था. वसुंधरा राजे के पिछले बीजेपी सरकार के शासनकाल में घोटालों और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की मांग को लेकर ही पायलट अनशन पर बैठे हैं. यह मामला आगे बढ़ता है और कांग्रेस हाईकमान अगर पायलट के आरोपों की जांच कराने का दबाब गहलोत के ऊपर डालती है तो वसुंधरा राजे के सियासी अरमानों को झटका लग सकता है.
बीजेपी में कई नेता सीएम चेहरे की रेस में
राजस्थान विधानसभा चुनाव में बीजेपी से मुख्यमंत्री पद के चेहरे की रेस में वसुंधरा राजे सिंधिया प्रबल दावेदार हैं. वसुंधरा दो बार राजस्थान की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं और तीसरी बार सीएम फेस बनने की कवायद में है. वसुंधरा के अलावा केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष पीएल पुनिया और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव भी सीएम फेस की दौड़ में है. पायलट की मांग चुनावी मुद्दा बनता है तो फिर वसुंधरा राजे के अरमानों को बड़ा झटका लग सकता, क्योंकि पार्टी फिर उनके चेहरे को आगे कर चुनावी मैदान में उतरने से बचेगी.
पीएम मोदी के चेहरे पर चुनाव लड़ेगी बीजेपी?
हालांकि, बीजेपी पहले ही रणनीति बना चुकी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे पर ही राजस्थान के विधानसभा चुनाव में उतरेगी. चुनाव नतीजे आने के बाद बीजेपी अगर जीतती है तो फिर मुख्यमंत्री का चेहरा तय किया जाएगा. देखा गया है कि बीजेपी जिस राज्य में विपक्ष में होती है, उन राज्यों में किसी भी नेता को सीएम का चेहरा बनाने से परहेज करती रही है और पीएम मोदी के चेहरे पर भी चुनाव लड़ती है. 2017 में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड, 2014 में हरियाणा, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने किसी को सीएम का चेहरा घोषित नहीं किया था. नरेंद्र मोदी के नाम पर चुनाव लड़ी और नतीजे आने के बाद सीएम के नाम पर मुहर लगी थी.
बीजेपी इसी फॉर्मूले पर राजस्थान में भी विधानसभा चुनाव लड़ने की रणनीति पर कदम बढ़ा सकती है. राजस्थान में बीजेपी के अंदर वसुंधरा राजे का विरोधी खेमा चाहता भी है कि पार्टी पीएम मोदी के नाम पर चुनाव लड़े और नतीजे के बाद सीएम का निर्णय करे जबकि वसुंधरा राजे खेमा चाहता है कि बीजेपी मुख्यमंत्री के चेहरे के साथ चुनावी रण में उतरे. ऐसे में पायलट ने जिस तरह से वसुंधरा राजे सरकार में हुए कथित भ्रष्टाचार के मामले को उठाया है और उसे लेकर आक्रामक तेवर अपना रखे हैं, उससे वसुंधरा राजे के सियासी भविष्य की राह में मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं?