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MP ही नहीं राजस्थान के लिए भी कुछ ऐसी ही है तैयारी, सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों को विधानसभा चुनाव में उतारेगी BJP

मध्य प्रदेश की तरह राजस्थान में भी बीजेपी केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को विधानसभा उम्मीदवार बना सकती है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक बीजेपी को लगता है कि इससे राज्य में पार्टी के पक्ष में माहौल बनेगा और जनता के बीच ऐसा मैसेज जाएगा कि बीजेपी चुनाव में अपनी बेस्ट टीम उतार रही है. 

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राजस्थान में भी एमपी जैसा प्रयोग करेगी भाजपा
राजस्थान में भी एमपी जैसा प्रयोग करेगी भाजपा

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़. इन तीनों राज्यों में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में हर पार्टी इन चुनावों की जीतने की तैयारी में जुटी है. इस बीच भाजपा ने सोमवार शाम मध्य प्रदेश चुनाव को लेकर उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी. इस सूची के सामने आने के बाद कई लोग तब हैरान हो गए जब देखा कि भाजपा ने इतनी बड़ी संख्या में सांसदों को विधानसभा चुनाव में उतारने का फैसला किया है. दरअसल MP में भाजपा ने अपने 7 सांसदों को विधायकी का चुनाव लड़ने के लिए मैदान में उतार दिया है. इन 7 सांसदों में से 3 केंद्रीय मंत्री भी हैं.

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इसके बाद खबर है कि मध्य प्रदेश की तरह राजस्थान में भी बीजेपी केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को विधानसभा उम्मीदवार बना सकती है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक बीजेपी को लगता है कि इससे राज्य में पार्टी के पक्ष में माहौल बनेगा और जनता के बीच ऐसा मैसेज जाएगा कि बीजेपी चुनाव में अपनी बेस्ट टीम उतार रही है. 

कांग्रेस पर मिलेगी मनोवैज्ञानिक बढ़त

इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि मंत्रियों और सांसदों को उतारने का कांग्रेस पर बीजेपी को मनोवैज्ञानिक बढ़त भी मिलेगी. पार्टी सूत्रों का कहना है कि जहां जैसी जरूरत होगी, वहां उसके मुताबिक उम्मीदवार उतारेंगें. 

इतनी बड़ी संख्या में सांसदों को उतारने का प्रयोग

हालांकि यह भाजपा का नया प्रयोग नहीं है. हां लेकिन, इतनी बड़ी संख्या में सांसदों को विधानसभा चुनाव लड़ाना अनूठा प्रयोग जरूर है. वैसे तो पार्टी इससे पहले भी कई विधानसभा चुनावों में सांसदों को विधानसभा चुनाव लड़वा चुकी है. कहीं पार्टी को फायदा भी हुआ तो कहीं नुकसान भी उठाना पड़ा. 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपने पांच मौजूदा लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को टिकट दिया है. केवल दो भाजपा सांसद जगन्नाथ सरकार और निसिथ प्रमाणिक अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों शांतिपुर और दिनहाटा से जीतने में सफल रहे, जहां से उन्होंने चुनाव लड़ा था. उस चुनाव में बीजेपी के दिग्गज नेता और सांसद स्वपन दासगुप्ता, लॉकेट चटर्जी और बाबुल सुप्रियो को हार का सामना करना पड़ा था.

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फेल रहा भाजपा का प्रयोग

अभिनेता से नेता बने और तत्कालीन राज्यसभा सांसद, सुरेश गोपी, जिन्होंने त्रिशूर से चुनाव लड़ा था, अंतिम वोटों की गिनती में तीसरे स्थान पर आए. इसी तरह, तत्कालीन राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री केजे अल्फोंस ने कांजीरापल्ली सीट पर कोई हलचल नहीं मचाई और चुनाव हार गए.

UP में भी फेल रही बीजेपी

इसके बाद 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने करहल की हाई-प्रोफाइल सीट पर केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल को अखिलेश यादव के खिलाफ खड़ा किया. इस चुनाव में भी समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने आगरा से मौजूदा बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल को बड़े अंतर से हरा दिया.

त्रिपुरा में मिला फायदा 

फिर भाजपा ने प्रतिमा भौमिक को निर्वाचित सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री होने के बावजूद त्रिपुरा से राज्य चुनाव लड़ने की अनुमति दी. उन्होंने धनपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की.

अबकी बार MP में प्रयोग करने जा रही भाजपा

गौर करने वाली बात है कि बीजेपी ने हाल के वर्षों में पहली बार किसी विधानसभा चुनाव में इतनी बड़ी संख्या में मौजूदा सांसदों को मैदान में उतारने का फैसला किया है. बीजेपी ने जिन सांसदों को टिकट दिया है वे सभी मध्य प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रीय इलाकों का प्रतिनिधित्व करते हैं. इन्हें मैदान में उतारकर बीजेपी ने साफ संकेत दिया है कि इस बार पार्टी सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने जा रही है और इसीलिए वह हर क्षेत्र से एक बड़ा चेहरा विधानसभा चुनाव में उतार रही है. क्या यह दांव रंग लाएगा, इसके लिए चुनावी नतीजों तक इंतजार करना ही होगा. 

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