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Kota: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे निर्माण स्थल पर अचानक ढही दीवार, ठेकेदार पर लगा 50 लाख रुपये का जुर्माना

कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे निर्माण कार्य के दौरान, एक टनल के बाहर कट एंड कवर सेक्शन में बन रही मीडियन साइड वर्टिकल दीवार अचानक ढह गई. हादसे क लेकर NHAI ने कहा है कि वह पूरी स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे.

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प्रतीकात्मक फोटो. (Meta AI)
प्रतीकात्मक फोटो. (Meta AI)

राजस्थान के कोटा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे निर्माण कार्य के दौरान एक टनल के बाहर कट एंड कवर सेक्शन में बन रही मीडियन साइड वर्टिकल दीवार अचानक ढह गई. इस घटना के बाद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने तत्काल कार्रवाई की और ठेकेदार पर 50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. 

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जांच समिति का गठन

इस हादसे की जांच करने और जिम्मेदारी तय करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है. इस समिति में शामिल हैं सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के डीजीआरडी (सेवानिवृत्त) एस.के. निर्मल, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के एडीजी (सेवानिवृत्त) ए.के. श्रीवास्तव और मेसर्स एलिगेंट इंजीनियरिंग के आलोक पांडे. टीम 2 दिसंबर 2024 को साइट का दौरा करेगी, ताकि ढहने के कारणों का पता लगाया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उपचारात्मक उपायों की सिफारिश की जा सके.

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'कारण बताओ नोटिस जारी किया गया'

मेसर्स हेक्सा कंपनी के साथ संयुक्त उद्यम और मेसर्स नोकांग इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से प्राधिकरण इंजीनियर, मेसर्स आईसीटी के टीम लीडर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. नोटिस में उनके स्तर पर सुरक्षा उपायों में चूक का हवाला दिया गया है, जिसके कारण दुर्घटना हुई.

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'NHAI की प्रतिक्रिया'

एनएचएआई ने आश्वासन दिया है कि स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं. प्राधिकरण ने कहा, हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों. उपचारात्मक उपाय और बेहतर सुरक्षा प्रोटोकॉल तुरंत लागू किए जाएंगे.

'एक्सप्रेसवे का महत्व'

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे एक प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजना है, जिसे दो महानगरों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने और यात्रा के समय को कम करने के लिए विकसित किया जा रहा है. हालांकि, इस तरह की घटनाएं निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों के सख्त पालन की महत्वपूर्ण आवश्यकता को उजागर करती हैं. जांच समिति के निष्कर्षों से चूक पर प्रकाश पड़ने और इसी तरह की परियोजनाओं में भविष्य की सुरक्षा प्रथाओं का मार्गदर्शन करने की उम्मीद है.

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