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राजस्थान के जंगलों में वन्यजीवों की गिनती, कैमरा ट्रैप लेकर वाटर पॉइंट पर 24 घंटे डटे वनकर्मी

Rajasthan News: इसके लिए परंपरागत रूप से वाटर होल पद्धति अपनाई जा रही है, जिसमें वनकर्मी मचान पर बैठकर जंगल के वाटर पॉइंट पर पानी पीने आने वाले वन्यजीवों की फोटो एविडेंस के साथ कैमरे में कैद कर रहे हैं, ताकि वन्यजीव की प्रजाति और उसके जेंडर का सही निर्धारण हो सके.

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मचान पर बैठ वन्यजीवों की गिनती करते वनकर्मी.
मचान पर बैठ वन्यजीवों की गिनती करते वनकर्मी.

राजस्थान के जंगलों में बीते कुछ वर्षों में हुई वन्यजीवों की मौत के बाद वास्तविक आंकड़ों पर सवाल उठते रहे हैं, जिसका फॉरेस्ट विभाग के पास भी इसका कोई ठोस जवाब नहीं होता था. लेकिन अब 4 साल बाद वन विभाग ने वन्यजीवों की गणना का फैसला किया है, जिससे जंगलों में बेजुबानों पर मंडराए काले बादल छंटने की उम्मीद है. प्रदेश के जंगलों में हजार से ज्यादा वाटर पॉइंट पर वनकर्मी 24 घंटे कैमरा ट्रैप के जरिए वन्यजीवों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं ताकि उनकी सटीक काउंटिंग की जा सके. इसके लिए जंगलों में तपती धूप में मचान पर बैठे वनकर्मी और वॉलिंटियर्स दिन-रात डटे हुए हैं. 

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मरु प्रदेश के तीनों टाइगर रिजर्व में शामिल जयपुर के झालाना लेपर्ड और आमागढ़ लेपर्ड रिजर्व में गणना शुरू हो गई है. इसके साथ ही तमाम वन्यजीव अभयारण्य और संरक्षित वन क्षेत्रों में मॉनिटरिंग हो रही है.

इसके लिए परंपरागत रूप से वाटर होल पद्धति अपनाई जा रही है, जिसमें वनकर्मी मचान पर बैठकर जंगल के वाटर पॉइंट पर पानी पीने आने वाले वन्यजीवों की फोटो एविडेंस के साथ कैमरे में कैद कर रहे हैं, ताकि वन्यजीव की प्रजाति और उसके जेंडर का सही निर्धारण हो सके.

मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक पीके उपाध्याय ने बताया, गुरुवार सुबह बजे से शुरू हुई वन्यजीव गणना में 24 घंटे वनकर्मी और वॉलिंटियर्स वन्यजीवों की काउंटिंग कर रहे हैं. वन्यजीव गणना की वन मुख्यालय से मॉनिटरिंग की जा रही है और इसकी रिपोर्ट फिर आगे भेजी जाएगी. काफी समय से कोरोना और फिर बे-मौसम बरसात की वजह से वाटर होल पद्धति से वन्यजीव गणना नहीं हो पाई थी. ऐसे में इस बार वन्यजीव गणना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. वाटर होल पद्धति से वन्यजीव गणना से वन्यजीवों की संख्या के वास्तविक आंकड़े मिल पाएंगे. वहीं, डीसीएफ जगदीश गुप्ता ने भी इस बार वन्यजीवों के आंकड़ों में बढ़ोतरी होने की उम्मीद जताई है. 

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गौरतलब है कि राजस्थान के जंगलों में मुख्यतः बाघ, बघेरा, रेगिस्तानी लोमड़ी, मरु बिल्ली, जरख, सियार, भेड़िया, भालू, चिंकारा, कृष्ण मृग, गोडावन, सियागोश जैसे कई वन्यजीवों की सभी प्रजातियां शामिल हैं. इसमें मांसाहारी, शाकाहारी और रेप्टाइल्स श्रेणियों में गणना की जा रही है. ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार राजस्थान में वन्यजीवों की जनसंख्या का आंकड़ा 3 लाख के पार जा सकता है. 

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