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Adhik Maas Sawan Somwar 2023: अधिकमास का पहला सावन सोमवार आज, बनने जा रहा ये शुभ संयोग, जानें पूजन विधि और महत्व

Adhik Maas Sawan Somwar 2023: सावन में सोमवार के व्रत का विशेष महत्व होता है. इस बार सावन का तीसरा और अधिकमास का पहला सोमवार व्रत 24 जुलाई यानी आज है. सावन में अधिकमास का यह संयोग 19 साल बनने जा रहा है. सावन का महीना भगवान शिव को बेहद प्रिय होता है.

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अधिकमास का पहला सावन सोमवार
अधिकमास का पहला सावन सोमवार

Adhik Maas Sawan Somwar 2023: अधिकमास का पहला सावन सोमवार या सावन का तीसरा सोमवार का व्रत 24 जुलाई यानी आज रखा जा रहा है. सावन के सभी सोमवार बेहद खास माने जाते हैं. लेकिन, इस सावन के तीसरे सोमवार की तिथि अधिकमास में पड़ी है इसलिए इसका महत्व और ज्यादा बढ़ गया है. सावन के सोमवार अधिकमास में पड़ने के कारण इस दिन भगवान शिव और श्रीहरि दोनों की उपासना की जाएगी. 

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क्यों खास है अधिकमास का पहला सोमवार

सावन महीने का पहला सोमवार 10 जुलाई को था, दूसरा सोमवार 17 जुलाई को था और अब सावन महीने का तीसरा सोमवार 24 जुलाई यानी आज है. खास बात यह है कि सावन महीने का तीसरा और अधिकमास का पहला सोमवार व्रत एक ही दिन यानी आज है. इसके बाद अधिकमास में अन्य दो और सोमवार भी पड़ेंगे. अधिक मास के पहले सोमवार पर शिवजी की पूजा करना और रुद्राभिषेक करना बेहद शुभ माना जाता है. साथ ही आज अधिक मास के पहले सोमवार पर बेहद खास योग भी बनने जा रहे हैं जिसमें रवि योग, शिव योग और सिद्ध योग है.

शिव योग: 23 जुलाई यानी कल दोपहर 02 बजकर 17 से शुरू होकर 24 जुलाई यानी आज दोपहर 02 बजकर 52 मिनट पर समाप्त होगा.
रवि योग: 24 जुलाई यानी आज सुबह 05 बजकर 38 से रात 10 बजकर 12 मिनट तक रहेगा. 

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अधिकमास के पहले सोमवार रुद्राभिषेक का मुहूर्त (Adhik Maas Sawan Somwar 2023 muhurat)

24 जुलाई यानी आज अधिकमास के पहले सोमवार पर रुद्राभिषेक करना सबसे शुभ माना जाता है. इस दिन शिववास नंदी पर है. आज दोपहर 01 बजकर 42 मिनट तक रुद्राभिषेक कर सकते हैं. इसके बाद शिववास भोजन में है, जिसमें रुद्राभिषेक नहीं करना चाहिए.

अधिकमास के पहले सोमवार की पूजन विधि (Adhik Maas Sawan Somwar 2023 Pujan Vidhi)

सुबह जल्दी उठ जाएं और स्नान कर स्वच्छ कपड़े पहनें. इसके बाद घर के मंदिर में दीप जलाएं. सभी देवी- देवताओं का गंगा जल से अभिषेक करें. शिवलिंग में गंगा जल और दूध चढ़ाएं. भगवान शिव को पुष्प अर्पित करें. भगवान शिव को बेल पत्र अर्पित करें. भगवान शिव की आरती करें और भोग भी लगाएं. इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है. भगवान शिव का अधिक से अधिक ध्यान करें. 

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