हिंदू धर्म में बुद्ध पूर्णिमा का विशेष महत्व बताया गया है. वैशाख महीने में पूर्णिमा के दिन ही भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था. इसलिए इस पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा कहा जाता है. इस साल बुद्ध पूर्णिमा का त्योहार 26 मई बुधवार को मनाया जाएगा. बुद्ध पूर्णिमा का पर्व बौद्ध अनुयायियों के साथ-साथ हिंदुओं के लिए भी बहुत खास महत्व रखता है. हिन्दू धर्म के अनुसार गौतम बुद्ध को भगवान श्री विष्णु का 9वां अवतार माना जाता है.
बुद्धत्व की प्राप्ति कैसे हुई?
हिंदू शास्त्रों के अनुसार, बुद्ध 29 वर्ष की आयु में घर छोड़कर सन्यास का जीवन बिताने लगे थे. उन्होंने एक पीपल वृक्ष के नीचे करीब 6 वर्ष तक कठिन तपस्या की. वैशाख पूर्णिमा के दिन ही भगवन बुद्ध को पीपल के वृक्ष के नीचे सत्य के ज्ञान की प्राप्ति हुई थी. भगवान बुद्ध को जहां ज्ञान की प्राप्ति हुई वह जगह बाद में बोधगया कहलाई. इसके पश्चात महात्मा बुद्ध ने अपने ज्ञान का प्रकाश पूरी दुनिया में फैलाया और एक नई रोशनी पैदा की. महात्मा बुद्ध का महापरिनिर्वाण वैशाख पूर्णिमा के दिन ही कुशीनगर में 80 वर्ष की आयु में हुआ था. भगवान गौतम बुद्ध का जन्म, सत्य का ज्ञान और महापरिनिर्वाण एक ही दिन यानी वैशाख पूर्णिमा के दिन ही हुआ. इस कारण वैशाख महीने में पूर्णिमा के दिन ही बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाती है.
कहां-कहां मनाई जाती है बुद्ध जयंती:
भारत के अलावा चीन, नेपाल, सिंगापुर, वियतनाम, थाइलैंड, जापान, कंबोडिया, मलेशिया, श्रीलंका, म्यांमार, इंडोनेशिया आदि विश्व के कई देशों में पूर्णिमा के दिन बुद्ध जयंती मनाई जाती है. बिहार में स्थित बोद्ध गया बुद्ध के अनुयायियों सहित हिंदुओं के लिए भी पवित्र धार्मिक स्थल माना जाता है. कुशीनगर में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर लगभग एक महीने तक मेला लगता है. हालांकि, कोरोना महामारी के चलते देशभर में लॉकडाउन की स्थिति जारी है. इसलिए हो सकता है इस साल मेले का आयोजन न किया जाए. श्रीलंका जैसे कुछ देशों में इस उस्तव को वैशाख उत्सव के रूप में मनाते हैं. बौद्ध अनुयायी इस दिन अपने घरों में दीपक जलाते हैं और घरों को सजाते हैं. इस दिन बौद्ध धर्म के ग्रंथों का पाठ किया जाता है.
मानसिक रोगों से मिलती है मुक्ति:
भगवान बुद्ध को उत्तरी भारत में भगवान श्री विष्णु का 9वां अवतार माना जाता है. हालांकि दक्षिण भारत में बुद्ध को विष्णु का अवतार नहीं माना जाता है. दक्षिण भारतीय बलराम को विष्णु का 8वां अवतार तो श्री कृष्ण को 9वां अवतार मानते हैं. बौद्ध धर्म के अनुयायी भी बुद्ध को भगवान विष्णु का अवतार नहीं मानते हैं. ऐसी मान्यताा है कि बुद्ध पूर्णिमा पर वातावरण में विशेष ऊर्जा आ जाती है. इस दिन चंद्रमा पूर्णिमा पृथ्वी और जल तत्व को पूर्ण रूप से प्रभावित करता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चन्द्रमा पूर्णिमा तिथि के स्वामी माने जाते हैं. इसलिए बुद्ध पूर्णिमा के दिन हर तरह की मानसिक समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है.
शुभ मुहूर्त:
बुद्ध पूर्णिमा 26 मई 2021, बुधवार
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ - 25 मई 2021 रात 8 बजकर 29 मिनट से
पूर्णिमा तिथि समापन - 26 मई 2021 शाम 4 बजकर 43 मिनट तक