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Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्माण्डा की उपासना, जानें पूजन विधि और प्रिय भोग

Chaitra Navratri 2025: नवरात्र के चौथे दिन हरे वस्त्र धारण करके मां कुष्माण्डा का पूजन करें. पूजा के दौरान मां को हरी इलाइची, सौंफ या कुम्हड़ा अर्पित करें. इसके बाद उनके मुख्य मंत्र "ॐ कुष्मांडा देव्यै नमः" का 108 बार जाप करें.

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ज्योतिष में माता कुष्मांडा का संबंध बुध ग्रह से माना जाता है.
ज्योतिष में माता कुष्मांडा का संबंध बुध ग्रह से माना जाता है.

Chaitra Navratri 2025: आज चौत्र नवरात्र का चौथा दिन है. नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्माण्डा का पूजन  होता है. अपनी हल्की हंसी के द्वारा ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इनका नाम कुष्माण्डा हुआ. ये अनाहत चक्र को नियंत्रित करती हैं. मां की आठ भुजाएं हैं. अतः ये अष्टभुजा देवी के नाम से भी विख्यात हैं. संस्कृत भाषा में कूष्माण्डा को कुम्हड़ कहते हैं और इन्हें कुम्हड़ा विशेष रूप से प्रिय है. ज्योतिष में इनका संबंध बुध ग्रह से है.  

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देवी कुष्माण्डा की पूजा विधि और लाभ
नवरात्र के चौथे दिन हरे वस्त्र धारण करके मां कुष्माण्डा का पूजन करें. पूजा के दौरान मां को हरी इलाइची, सौंफ या कुम्हड़ा अर्पित करें. इसके बाद उनके मुख्य मंत्र "ॐ कुष्मांडा देव्यै नमः" का 108 बार जाप करें. चाहें तो सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें. 

बुध को मजबूत करने के लिए करें मां कुष्मांडा की पूजा
मां कुष्माण्डा को उतनी हरी इलाइची अर्पित करें जितनी कि आपकी उम्र है. हर इलाइची अर्पित करने के साथ "ॐ बुं बुधाय नमः" कहें. सारी इलाइचियों को एकत्र करके हरे कपडे में बांधकर रख लें. इन्हें अपने पास अगली नवरात्रि तक सुरक्षित रखें.

मां कुष्माण्डा का विशेष प्रसाद
इस दिन मां को आज के दिन मालपुए का भोग लगाएं. इसके बाद उसको किसी ब्राह्मण या निर्धन को दान कर दें. इससे बुद्धि का विकास होने के साथ-साथ निर्णय क्षमता अच्छी हो जाती है. आप चाहें तो देवी को पीले रंग की मिठाई या फल का भी भोग लगा सकते हैं.

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मां कुष्‍मांडा पूजा मंत्र
1. बीज मंत्र: कुष्मांडा: ऐं ह्री देव्यै नम:
2. ध्यान मंत्र: वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्। सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥
3. पूजा मंत्र: ॐ कुष्माण्डायै नम:
4. या देवी सर्वभूतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
5. ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।

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