Guru Ravidas Jayanti 2021: रविदास भारत में 15वीं शताब्दी के एक महान संत, दर्शनशास्त्री, कवि, समाज-सुधारक और ईश्वर के अनुयायी थे. वो निर्गुण संप्रदाय अर्थात् संत परंपरा में एक चमकते नेतृत्वकर्ता और प्रसिद्ध व्यक्ति थे. उत्तर भारतीय भक्ति आंदोलन को नेतृत्व देते थे. ईश्वर के प्रति अपने असीम प्यार और अपने चाहने वाले, अनुयायी, सामुदायिक और सामाजिक लोगों में सुधार के लिए अपने महान कविता लेखनों के जरिए संत रविदास ने विविध प्रकार की आध्यात्मिक और सामाजिक संदेश दिए. गुरु रविदास जयंती के मौके पर आज आपको उनके अनमोल विचार के बारे में बताते हैं.
जो मिला उसे सहर्ष अपनाया- संत रविदास को जूते बनाने का काम पैतृक व्यवसाय के तौर पर मिला. उन्होंने इसे खुशी से अपनाया. वे अपना काम पूरी लगन से करते थे. यही नहीं वे समय के पाबंद भी थे.
सबकी मदद करते थे- रैदास की खासियत ये थी कि वे बहुत दयालु थे. दूसरों की मदद करना उन्हें भाता था. कहीं साधु-संत मिल जाएं तो वे उनकी सेवा करने से पीछे नहीं हटते थे.
अन्याय को कभी नहीं सहा- उन्होंने समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई. छुआछूत आदि का उन्होंने विरोध किया और पूरे जीवन इन कुरीतियों के खिलाफ ही काम करते रहे.
कभी आलोचना नहीं की- संत रविादास के बारे में कहा जाता है कि वे जूते बनाने का काम बड़ी मेहनत से किया करते थे. वे समाज की कुरीतियों के खिलाफ आवाज तो उठाते थे पर उन्होंने कभी किसी की आलोचना नहीं की.
कर्म में विश्वास- इंसान का विश्वास सदैव कर्म में ही होना चाहिए. कर्म के बदले मिलने वाले फल की आशा कभी नहीं छोड़नी चाहिए. कर्म हमारा धर्म है और फल हमारा सौभाग्य.