कोरोना महामारी के दो साल बाद आज देशभर में हर्षोल्लास और गणपित बप्पा मोरया के जयकारों के साथ गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जा रहा है. ऐसे में गणेश पूजा के अवसर पर ओडिशा के कलाकारों ने अलग-अलग तरह से कलाकृतियां बनाकर भगवान गणेश की आराधना की. कलाकारों द्वारा बनाई गई गणपति की अनोखी मूर्तियां लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रहीं.
गणेश चतुर्थी के अवसर पर पद्मश्री से सम्मानित कलाकार सुदर्शन पटनायक ने पुरी के समुद्र तट पर 3,425 रेत से बने लड्डू के उपयोग से गणेश की 6 फीट ऊंची प्रतिमा बनाई. सुदर्शन ने गणपति की मूर्ति के साथ दो हाथी भी बनाए और पूरे देश को गणेश चतुर्थी का संदेश दिया है. इसमें सुदर्शन ने हाथियों को पर्यावरण के लिए प्रार्थना करते हुए दिखाया है.
वहीं, लोकप्रिय मिनिएचर कलाकार एल ईश्वर राव ने कांच की बोतल के अंदर गणेश की ढाई इंच का ईको-फ्रेंडली मूर्ति बनाई. राव ने बताया कि गणेश की मूर्ति पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल है. गणपति बप्पा की मूर्ति को मिट्टी से बनाया गया है और इसकी ऊंचाई ढाई इंच है. इसे बनाने में उन्हें सात दिन का समय लगा है. उन्होंने देशवासियों को गणेश चतुर्थी की भी बधाई भी दी.
अंतराष्ट्रीय बालुका कलाकार मानस साहू ने 15 टन रेत की मदद से 15 फीट चौड़ा गणपति बनाया. साहू ने बताया कि गणपति की इस मूर्ति को बनाने में उन्हें सात घंटे का समय लगा.
तो वहीं, भुवनेश्वर में बकुल फाउंडेशन के सदस्यों ने एक पेड़ को गणेश का रूप देकर पूजा-अर्चना की. गणेश पूजा के अवसर पर फाउंडेशन के सदस्यों ने एक पेड़ का चयन किया, जिसमें उन्होंने अपनी चित्रकारी का प्रदर्शन करते हुए सूंड और हाथ बनाए. पेड़ को वस्त्र स्वारूप धोती और गमछा भी पहनाया गया. दूर से देखने पर ये पेड़ हू-ब-हू गणपति लगता है.