माता वैष्णो देवी हिंदुओं के सबसे प्रसिद्ध दर्शनीय स्थानों में से एक है. वैष्णो देवी का मंदिर जम्मू-कश्मीर से लगभग 43 किलोमीटर दूर कटरा में स्थित है. यहां साल भर लोगों की भीड़ लगी रहती है. अभी शारदीय नवरात्रि चल रही हैं और ऐसे में लाखों लोग मां वैष्णो देवी के दर्शन के लिए कटरा पहुंच रहे हैं. नवरात्रि में मां वैष्णो देवी के भवन को रंग-बिरंग विदेशी फूलों के साथ-साथ फलों से भी देवी मां के मंदिर को सजाया गया है. शनिवार-रविवार को हुई बारिश से भवन का मौसम और अच्छा हो गया है.
बारिश में भीगी पहाड़ियां, देवी मां के जयकारे लगाते हुए लोग, गूंजते हुए मां के भजन और भवन पर की गई रोशनी, हर एक चीज वहां पर दैवीय शक्ति का अनुभव करा रही है. दिल्ली के फ्लॉवर्स डेकोरेशन वाली एक कंपनी हर बार माता वैष्णों के दरबार को फूलों से सजाती है. हर बार की तरह इस बार भी माता के भवन को 500 क्विंटल विदेशी फूलों से सजाया गया है.
जो लोग मां वैष्णो देवी के लिए इन नवरात्रि नहीं जा पाए हैं, वो लोग फोटोज में देवी मां के भवन के दर्शन कर सकते हैं.
कुछ परंपराओं का मानना है कि यह मंदिर सभी शक्तिपीठों में सबसे पवित्र है क्योंकि यहां माता सती का कपाल गिरा था. वहीं कुछ मानना है कि यहां देवी मां का दाहिना हाथ गिरा था. माता वैष्णो की इस पवित्र गुफा में एक मानव हाथ के पत्थर के अवशेष मिलते हैं, जिन्हें वरद हस्त (वरदान और आशीर्वाद देने वाला हाथ) के रूप में जाना जाता है.
आम तौर पर माना जाता है कि पांडवों ने सबसे पहले देवी मां के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता में कोल कंडोली और भवन में मंदिर बनवाए थे. त्रिकुटा पर्वत के ठीक बगल में एक पहाड़ पर और पवित्र गुफा के ऊपर पांच पत्थर की संरचनाएं हैं, जिन्हें पांच पांडवों के चट्टानी प्रतीक माना जाता है.
शायद पवित्र गुफा में किसी ऐतिहासिक व्यक्ति की यात्रा का सबसे पुराना संदर्भ गुरु गोबिंद सिंह का है, जिनके बारे में कहा जाता है कि वे पुरमंडल के रास्ते वहां गए थे. पवित्र गुफा तक जाने वाला पुराना पैदल मार्ग इस प्रसिद्ध तीर्थस्थल से होकर गुजरता था.
ये देवी मां की मुख्य गुफा है. दिव्य ज्ञान और सच्चे ज्ञान की स्वरूप मां सरस्वती,समृद्धि, सौभाग्य, और समग्र कल्याण की स्वरूप मां लक्ष्मी और आत्मविश्वास और शक्ति की स्वरूप मां काली इस गुफा में पिंडी के रूप में विराजमान हैं.
विदेशों से आए फूलों में हाइड्रेंजिया मिश्रित, राजा प्रोटिया गुलाबी, केप बाल्टी, हाइपरिकम बेरी लाल, बंकासिया मिश्रित, सिम्बिडियम और ट्यूलिप के अलावा इटालियन रस्कस और सिल्वर डॉलर से भवन को सजाया गया है.
वहीं देसी फूलों में गुलाब, कार्नेशन, लिमोनियम, ऑर्किड बैंगनी और हरा, गुलदाउरी, जरबेरा, हाइड्रेंजिया, एशियाई लिली, सेलोसिया गहरा गुलाबी/पीला/लाल, स्नैपड्रैगन (पीला और सफेद) और जिप्सोफिला शामिल है.
यहां की खूबसूरती ऐसी है, मानो आप स्वर्ग में आ गए हो. चारों तरफ फूल ही फूल. देवी मां की बड़ी सी पूर्ति, पवित्र गुफा, वहां की शांति, पहाड़, पेड़ सभी मां वैष्णो की उपस्थिति दर्ज करा रहे थे.
5 अक्टूबर यानी शनिवार को बारिश होने से वहां का मौसम और भी अच्छा हो गया था. बादल गरज रहे थे और बारिश ने भी सर्दी बढ़ा दी थी.
मां वैष्णों के भवन के बाहर बांस के बने हुए प्रवेश द्वार पर प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की प्रतिमा विराजमान थी. रंग-बिरंगे फूलों से उनको सजाया गया था जो देखने में ही काफी खूबसूरत लग रहा था.
इसके बाद अंदर जाते ही बड़े से होर्डिंग पर गुलाबी और पीले रंग के गुलाब से जय माता दी और शुभ नवरात्रि लिखा हुआ था.
आगे बढ़ेंगे तो प्रसादी भेंट केबिन के सामने लाल और सफेद गुलाब के फूलों से 'ऊं गणपतये नम:' लिखा था जहां लोग फोटोज भी क्लिक करा रहे थे.
बीच की गैलरी को फूलों की लड़ियों से काफी अच्छी तरह सजाया गया है और बीच में लाइट के लैंप भी लगाए हुए हैं. लोग इस खूबसूरती को अपने मोबाइलों में भी कैद कर रहे थे.
जब और अंदर जाएंगे तो भोजन शाला के सामने तिरंगे के तीन रंग ऑरेंज, व्हाइट और ग्रीन कलर से डेकोरेशन किया गया है.
गैलरी से लेकर अंदर तक चारों और फूल ही फूल से भवन को सजाया गया है. भीड़ इतनी कि पैर रखने को भी जगह नही ंहै. लेकिन भक्ति से सराबोर लोग भीड़ के बाद भी माता के दर्शन के लिए लंबी लाइनों में लगे हैं.
फूलों को 4 मंजिल वाला झूमर भी बनाया है जिसमें सफेद, नारंगी और पर्पल फूलों का इस्तेमाल किया गया है. इस फूलों वाले झूमर की कीमत करीब 6-7 फीट है.
गैलरी के बाद जब पवित्र गुफा की ओर बढ़ते हैं तो सामने ही एक भगवान शंक की विशालकाय मूर्ति स्थापित की गई है. भगवान शिव पृथ्वी के ऊपर खड़े हैं और उनके साथ में देवी दुर्गा महिषासुर राक्षस का वध कर रही हैं.