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भगवान और भक्त का रिश्ता अनोखा होता है. भक्त अलग-अलग तरीके से अपने ईश्वर को खुश करने की कोशिश करते हैं ताकि ईश्वर की उन पर कृपादृष्टि पड़े. लेकिन भगवान के प्रति अपनी आस्था और समर्पण प्रकट करने के लिए भक्त कई बार ऐसे काम कर जाते हैं जिन्हें देख दुनिया हैरान रह जाती है. कुछ ऐसा ही जयपुर की रहने वाली पूजा सिंह ने भी किया, जिन्होंने पूरे रीति-रिवाजों के साथ भगवान विष्णु की मूर्ति से विवाह रचा लिया. पूजा ने इस दौरान सारी रस्में निभाई और उनकी बारात में सैकड़ों लोग भी जुटे.
पूजा ने 8 दिसंबर को जयपुर में भगवान विष्णु की मूर्ति से शादी की थी. हालांकि कई शास्त्रियों ने इस शादी पर अपनी प्रतिक्रिया भी दी.
शास्त्रियों ने बताया भगवान से विवाह का महत्व
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में धर्मशास्त्र मीमांसा विभाग के प्रोफेसर माधव जनार्दन रटाटे ने बताया कि परमात्मा सबके पति और पिता होते हैं. यदि उच्च कोटि की भक्ति हो तो भगवान से विवाह किया जा सकता है. जैसे मीरा बाई ने भगवान श्री कृष्ण को अपना पति मान लिया था, उसी तरह भक्त कई बार अपने ईश्वर को अपना जीवनसाथी स्वीकार कर लेते हैं. लेकिन अगर यह केवल दिखावा करने के लिए किया जाए तो यह उचित नहीं है.
काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के न्यासी सदस्य और ज्योतिषाचार्य पंडित दीपक मालवीय ने बताया कि भगवान के साथ विवाह करने का मतलब ईश्वर के प्रति खुद को समर्पित कर देना है. इस महिला की आस्था और श्रद्धा भगवान के चरणों में होगी तभी उसने ऐसा कदम उठाया है. जिस तरह मीराबाई अविवाहित रहकर भगवान कृष्ण की सेवा करती रहीं उसी तरह इस महिला को भी देखा जा सकता है. ऐसी भी मान्यता है कि किसी मांगलिक कन्या का विवाह अगर पहले भगवान विष्णु से करा दिया जाए तो उसका मांगलिक दोष दूर हो जाता है.
शास्त्रों में विवाह का मतलब
शास्त्रों के मुताबिक, भगवान विष्णु से मांगलिक कन्याओं का विवाह कराना बहुत ही आम बात है. भगवान से विवाह के पीछे दो वजह हो सकती हैं. पहली वजह ये है कि ऐसा उसने ईश्वर के प्रति आस्था और समर्पण के लिए किया हो. दूसरी वजह यह हो सकती है कि वो खुद का प्रचार करना चाहती हो, जो गलत है.