महान अर्थशास्त्री व राजनीतिज्ञ का दर्जा प्राप्त कर चुके आचार्य चाणक्य ने इंसान के जीवन के सभी पहलुओं को लेकर कुछ ना कुछ नीतियां और उपाए बताए हैं. चाणक्य की ये नीतियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी की सदियों पहले हुआ करती थीं. इसी प्रकार आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति की किताब 'चाणक्य नीति' के एक श्लोक में कुछ प्वॉइंट्स को बताया है और उसे दूसरों से शेयर करने से मना किया है.
सुसिद्धमौषधं धर्मं गृहच्छिद्रं च मैथुनम्।
कुभुक्तं कुश्रुतं चैव मतिमान्न प्रकाशयेत्॥
आचार्य चाणक्य के अनुसार, बुद्धिमान व्यक्ति अगर किसी तरह की दवाई या औषधि ले रहा है, तो उसे किसी और को नहीं बताना चाहिए, क्योंकि अपनी दवाइयों के बारे में दूसरों से बताने पर स्वास्थ्य पर उल्टा प्रभाव पड़ता है.
वहीं चाणक्य ये भी कहते हैं कि चाहें कितनी भी विकट स्थिति आ जाए पर अपने घर का भेद दूसरों को नहीं बताना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने पर दुश्मन इसका फायदा उठा सकता है या आपको बर्बाद करने के लिए साजिश रच सकता है.
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि परिवार के किसी सदस्य की किसी दूसरे से बुराई नहीं करनी चाहिए. चाणक्य कहते हैं कि अगर आपस में एक-दूसरे से कोई शिकायत है भी तो उसे आपस में ही सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए, क्योंकि दूसरों को बताने पर वे आपके परिवार का मजाक बनाते हैं और ऐसा कर वे आपके सम्मान को ठेस पहुंचाते हैं.
चाणक्य कहते हैं कि संभोग के दौरान गलती हो जाए तो इसे भी किसी दूसरे से शेयर नहीं करना चाहिए, क्योंकि इन बातों को बताने पर समाज आपके और आपके चरित्र पर संदेह करने लगता है. साथ ही चाणक्य ये भी कहते हैं कि यदि किसी व्यक्ति को खराब भोजन करना पड़े या करें तो इस बारे में भी किसी दूसरे को नहीं बताना चाहिए.
इस श्लोक के आखिर में चाणक्य कहते हैं कि लोगों से सुने बुरे शब्द को दूसरों तक नहीं पहुंचने देना चाहिए, क्योंकि बुराई और निंदा वाले शब्दों को खुद तक ही रखना चाहिए. इससे व्यक्ति का मान-सम्मान बना रहता है.
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