scorecardresearch
 

Chanakya Niti: व्यक्ति को अंदर ही अंदर जलाते हैं ये 4 दुख

चाणक्य नीति के अनुसार हर व्यक्ति के जीवन में सुख-दुख लगा रहता है. वहीं, जीवन में कुछ ऐसे मोड़ भी आते हैं जिनका दुख व्यक्ति को अंदर ही अंदर जलाता रहता है. आइए जानते हैं ऐसे दुखों के बारे में...

Advertisement
X
Chanikya Niti: चाणक्य नीति
Chanikya Niti: चाणक्य नीति

आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र (Chanakya Niti) में धन, तरक्की, वैवाहिक जीवन, सुख-दुख समेत तमाम विषयों से जुड़ी समस्याओं का जिक्र किया है. साथ ही कुछ परेशानियों के समाधन भी बताए हैं. चाणक्य नीति के अनुसार हर व्यक्ति के जीवन में सुख-दुख लगा रहता है. वहीं, जीवन में कुछ ऐसे मोड़ भी आते हैं जिनका दुख व्यक्ति को अंदर ही अंदर जलाता रहता है. आइए जानते हैं ऐसे दुखों के बारे में...

Advertisement

> जीवनसाथी का वियोग
आचार्य चाणक्य के अनुसार कोई व्यक्ति अपने जीवनसाथी को छोड़ना नहीं चाहता. पत्नी या प्रेमिका और पति या प्रेमी का वियोग सहन करना आसान नहीं होता. जीवनसाथी का साथ छोड़ जाना व्यक्ति को मन ही मन कचोटता रहता है. साथ छूटने या साथी के दूर चले जाने का विचार व्यक्ति के भीतरी दुख पहुंचाता है. 

देखें: आजतक LIVE TV 


> कर्ज का बोझ
कर्ज के बोझ में व्यक्ति अंदर ही अंदर खुद को दबा हुआ महसूस करता है. सभ्य व्यक्ति जब किसी से कर्ज लेता है वो अपराध बोध में जीने लगता है. चाणक्य कहते हैं कि कर्ज के बोझ की वजह से वे व्यक्ति कहीं ना कहीं खुद को कमजोर महसूस करने लगता है.


 > रिश्तेदारों द्वारा अपमान
किसी रिश्तेदार या सगे संबंधी द्वारा अपमान का सामना करना पड़ता है तो व्यक्ति मानसिक दुखी होता है. चाणक्य के अनुसार अपने संबंधियों द्वारा अपमानित होने के बाद व्यक्ति जब उस शख्स का सामना करता है तो बीता हुआ समय नहीं भुला पाता.

Advertisement


> गरीबी
चाणक्य के अनुसार धन की कमी व्यक्ति को दुखी रखती है. गरीबी दुख का बड़ा कारण है. गरीब व्यक्ति आर्थिक तंगी के चलते अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति भी मुश्किल से कर पाता है. गरीबी में दबी हुई इच्छाएं व्यक्ति को अंदर ही अंदर जलाती हैं.

 

Advertisement
Advertisement