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झारखंडः सावन में श्रद्धालुओं के लिए नहीं खुलेगा देवघर बैद्यनाथ धाम मंदिर, वर्चुअल दर्शन की व्यवस्था

देवघर के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि लोगों को सावन में देवघर नहीं पहुंचने का आग्रह किया जा रहा है. इसके लिए सड़क मार्ग से देवघर पहुंचने के रास्ते पर भी बेरिकेडिंग की जा रही है. रेलवे अधिकारियों से भी सहयोग लिया जा रहा है.

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देवघर में बाबा बैद्यनाथ मंदिर लोगों के लिए बंद रहेगा (फोटो-धनंजय भारती)
देवघर में बाबा बैद्यनाथ मंदिर लोगों के लिए बंद रहेगा (फोटो-धनंजय भारती)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • राजकीय श्रावणी मेला के दौरान श्रद्धालुओं के लिए नहीं खुलेगा मंदिर
  • 'सुबह-संध्या आरती का ऑनलाइन दर्शन कराने की व्यवस्था की जा रही'
  • ऑनलाइन पूजा की व्यवस्था पुरोहित के विरोध के बाद वापस लियाः DC

झारखंड के देवघर में इस बार राजकीय श्रावणी मेला के दौरान श्रद्धालुओं के लिए विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर नहीं खोलने का निर्णय लिया गया है. जिला प्रशासन द्वारा सुबह और संध्या आरती का श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन दर्शन कराने की व्यवस्था की जा रही है.

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देवघर के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि बाबा बैद्यनाथ के भक्तों के लिए ऑनलाइन पूजा की जगह ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था की जाएगी. कोरोना संक्रमण के रोकथाम और श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य सुरक्षा को देखते हए श्रावणी मेले के आयोजन को इस साल भी स्थगित रखा गया है.

ऑनलाइन पूजा पर पुरोहित समाज का विरोध
उन्होंने कहा कि ऐसे में श्रद्धालुओं की आस्था और सुविधा को देखते हुए श्रावण मास में ऑनलाइन वर्चुअल दर्शन की व्यवस्था की जा रही है. इससे पहले ऑनलाइन पूजा और दर्शन की व्यवस्था करने पर विचार किया जा रहा था, लेकिन स्थानीय पुरोहित समाज द्वारा इसका विरोध किए जाने पर ऑनलाइन पूजा का निर्णय वापस ले लिया गया है.

इस बार भी श्रद्धालुओं के लिए नहीं खुलेगा मंदिर
इस बार भी श्रद्धालुओं के लिए नहीं खुलेगा मंदिर

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उपायुक्त ने बताया कि लोगों को सावन में देवघर नहीं पहुंचने का आग्रह किया जा रहा है. इसके लिए सड़क मार्ग से देवघर पहुंचने के रास्ते पर भी बेरिकेडिंग की जा रही है. रेलवे अधिकारियों से भी सहयोग लिया जा रहा है.

बीते 2 साल से कांवड़ यात्रा बंद है. अलग-अलग राज्यों समेत नेपाल और अंतरराष्ट्रीय कांवड़ यात्री भी यहां आते हैं. लगभग 40 से 50 लाख कांवड़ यात्री हर साल यहां स्पर्श पूजा किया करते थे. जब ऑनलाइन पूजा की व्यवस्था शुरू करने की चर्चा चल रही थी तो उसका पांडा समाज ने विरोध किया था. यहां स्पर्श पूजा की परंपरा है. लिहाजा भक्तों की भावनाओं का ख्याल रखकर वर्चुअल दर्शन की व्यवस्था की जा रही है यानी ऑनलाइन दर्शन होंगे पूजा नहीं.

 

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