कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस (Dhanteras) मनाया जाता है. इस दिन भगवान धनवंतरि और धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है. धनतेरस के मौके पर सोना, चांदी और अधिकतर बर्तन की खरीदारी की जाती है.
इस साल 13 नवंबर को धनतेरस है. धनतेरस की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 5:28 से लेकर 5:59 बजे तक है. आइए वास्तु (Vastu Shastra) के अनुसार जानते हैं कि धनतेरस पर किन खास बातों का रखें ध्यान.
> धनतेरस के दिन उत्तर दिशा का विशेष महत्व होता है. घर में उत्तर दिशा कुबेर की दिशा मानी जाती है, क्योंकि उत्तर दिशा के स्वामी कुबेर (Kuber) हैं, जिन्हें धन का देवता (God of wealth) भी कहा जाता है. घर की उत्तर दिशा के वास्तु दोष मुक्त होने पर धन वैभव की वृद्धि होती है.
> वास्तु के अनुसार आर्थिक समृद्धि के लिए घर की उत्तर दिशा में धनतेरस के दिन कलश में जल और उसमें एक चांदी का सिक्का डाल दें. इससे धन की बचत होती है.
> धनतेरस से पहले इस बात का विशेष ध्यान रखें कि घर में जितने भी नल टपकते हों उन्हें सही करा लें. वास्तु के अनुसार नल से टपकने का मतलब पैसे का भी पानी की तरह बहना माना जाता है.
> धनतेरस के दिन कैंची, चाकू और धारदार चीजें तो भूलकर भी नहीं खरीदनी चाहिए.
> नवीन झाडू एवं सूपड़ा खरीदकर उनका पूजन करना धनतेरस पर शुभ माना जाता है.
> धनतेरस के दिन सायं काल दीपक प्रज्वलित करके घर, दुकान आदि को श्रृंगारित करना चाहिए.
> धनतेरस के दिन शाम के समय तेरह दीपक प्रज्वलित करके तिजोरी में कुबेर का पूजन करें.